शहर के अलग-अलग इलाकों में बनी नगर निगम की 100 से ज्यादा दुकानें पिछले 10-15 सालों से बिक नहीं पाई हैं। इन कमर्शियल कांप्लेक्स को बनाने में निगम को जितना खर्च करना पड़ा है, उसकी लागत भी अब तक वसूल नहीं हुई है। कुछ जगह के कांप्लेक्स में निगम को खुद के ऑफिस खोलने पड़ गए। कई कांप्लेक्स व दुकानें सालों से खाली रहने के कारण खराब होने की कगार पर पहुंच रहे हैं। इनमें कई प्राइम लोकेशन में हैं। भास्कर ने ऐसी दुकानें खोजी फिर उसी के आस-पास प्राइवेट बिल्डरों की दुकानों की जानकारी जुटाई। पता चला प्राइम लोकेशन में होने के बावजूद निगम की दुकानें नहीं बिक रही जबकि प्राइवेट बिल्डरों की दुकानें हाथों हाथ बिक चुकी हैं। वजह- निगम की दुकानें प्राइवेट बिल्डरों की तुलना में सस्ती होने के बावजूद नियम-शर्तों के कारण इतनी महंगी हो जाती हैं कि आम कारोबारी की पहुंच से दूर हो जाती हैं। पड़ताल के अनुसार निगम कोई कांप्लेक्स बनाता है तो उसकी कीमत निर्धारण के लिए लागत को आधार लिया जाता है। नगर निगम सरकारी एजेंसी है। यह मुनाफे के लिए कोई योजना नहीं बना सकती। इसलिए दुकानों की कीमत में जमीन और उसकी निर्माण लागत ही शामिल की जाती है। इस तरह समझें कैसे महंगी हो जाती हैं दुकानें मालवीय रोड का जवाहर मार्केट। ग्राउंड फ्लोर की दुकानें व्यवस्थापन के तहत दी गई हैं। यहां दूसरे से 8वें माले तक की दुकानें और हॉल खाली पड़े हैं। निगम का औसत रेट 5209 रुपए प्रति वर्गफीट है। इसी के आसपास प्राइवेट कांप्लेक्स में दुकानों की कीमत छह से 10 हजार रुपए प्रति वर्गफीट है। कोई अगर जवाहर मार्केट में निगम का 2000 वर्गफीट का हॉल लेता है तो उसकी कीमत होगी 1.04 करोड़। इस पर हर साल दो लाख किराया देना होगा। हर तीन साल में किराया 5 प्रतिशत बढ़ेगा। 30 साल बाद फिर से लीज रिनीवल कराना होगा। दुकान की कीमत और किराया मिलाकर कुल कीमत 1.67 करोड़ हो जाएगी। प्राइवेट बिल्डर से 8 हजार वर्गफीट खरीदने पर 1.60 करोड़ देने होंगे। बिल्डरों से सस्ती फिर भी नहीं बिकीं जगह (दुकानें) निगम का रेटप्राइवेट रेट जवाहर मार्केट (20) 5209 6 से 10 हजार मोहबा बाजार (14) 4520 5 से 8 हजार मंगलम कांप्लेक्स (12) 4198 7 से 10 हजार जयस्तंभ चौक (1) 9493 8 से 12 हजार गांधी मैदान (55) 11362 7 से 10 हजार (दुकानों का रेट रुपए प्रति वर्ग फीट) निगम व शर्तें जो भारी पड़ रहीं खरीदारों पर गांधी मैदान के पास निगम ने कांजी हाउस कांप्लेक्स बनाया है। ये भी प्राइम लोकेशन पर है पर 55 दुकानें अब तक नहीं बिक पाई हैं। इन दुकानों की कीमत 11361 रुपए प्रति वर्गफीट है। ये कीमत इसी के आसपास बने प्राइवेट बिल्डरों के कांप्लेक्स से प्रति वर्गफीट करीब एक हजार ज्यादा है। यहां 146.92 वर्गफीट की दुकान की कीमत 16.61 लाख है। प्राइवेट बिल्डर की 146.92 वर्गफुट दुकान 10 हजार की दर पर खरीदने पर 14.60 लाख ही देने होंगे। हर साल दो प्रतिशत किराया देना होगा। हर तीन साल में किराया 5 प्रतिशत बढ़ेगा। 30 साल बाद रिनीवल का झंझट रहेगा। रियल एस्टेट से जुड़े लोगों का कहना है कि नियम-शर्तें इतनी अधिक होती हैं कि लोग बेवजह फंसना नहीं चाहते।


