बीकानेर की मिट्टी में होने वाली मूंगफली अपने स्वाद के कारण पूरी दुनिया में खरीदारों की पहली पसंद है। मूंगफली से नमकीन प्रोडक्ट्स बनाने वाली बड़ी कंपनियां बीकाजी, बीकानेरवाल, भीखाराम-चांदमल और हल्दीराम आदि बीकानेर में पैदा हुई मूंगफलियों की डिमांड करती हैं। बीकानेर जिले में हर साल 1 करोड़ मूंगफली की बोरियों का उत्पादन होता है। एक बोरी का वजन 35 किलोग्राम होता है। इस बार पूरे बीकानेर में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। ऐसे में मंडी व्यापारियों और निर्यातकों को इस बार 1 करोड़ 25 लाख बोरियों के उत्पादन की उम्मीद है। बीकानेर की मूंगफली का स्वाद और पौष्टिक गुणों के कारण चीन इसका सबसे बड़ा खरीदार है। इसके अलावा यहां की मूंगफली यूरोपीय देशों, थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका तक जाती है। दुनियाभर में स्नैक्स बनाने वाली बड़ी कंपनियां बीकानेर की मूंगफली की डिमांड करती हैं। म्हारे देस की खेती में इस बार बात बीकानेर की मूंगफली की…. बीकाजी नमकीन हो या फिर हल्दीराम। या फिर सर्दियों में साहूजी गजक। देश के बड़े ब्रांड बीकानेर की मूंगफली की मांग करते हैं। बीकानेर की धरती पर इंदिरा गांधी नहर परियोजना के पानी से पैदा हुई मूंगफली की बात ही अलग है। इसका दाना-दाना ऑयल और पौष्टिक तत्वों से भरपूर है। यही वजह है कि बड़ी कंपनियां और देशभर में छोटे से लेकर बड़े दुकानदार और बड़े कारोबारी भी बीकानेरी मूंगफली की डिमांड करते हैं। यह डिमांड विदेशों तक है। मूंगफली से दर्जनों प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। देश में सबसे अधिक और सबसे बेहतर गुणपत्ता की मूंगफली बीकानेर में होती है। बीकानेर में इस बार मूंगफली का रिकॉर्ड उत्पादन बीकानेर के मूंगफली निर्यातक बृजमोहन चांडक ने बताया- जिले में हर साल करीब 1 करोड़ बोरी मूंगफली का उत्पादन होता है। एक बोरी में 35 किलो मूंगफली आती है। पिछले साल तक ये उत्पादन एक करोड़ बोरी तक पहुंचा था। इस बार ये मात्रा बढ़कर सवा करोड़ बोरी तक तो लगभग पहुंच गई है। बीकानेर की अनाज मंडी के साथ ही ऊन मंडी में भी इन दिनों मूंगफली की ढेरियां नजर आ र रही हैं। नोखा, लूणकरनसर, श्रीडूंगरगढ़ सहित अन्य ग्रामीण मंडियों में भी हर तरफ मूंगफली ही मूंगफली नजर आ रही है। यूरोपीय देशों, चीन, थाईलैंड व पड़ोसी देशों में डिमांड बृजमोहन चांडक ने बताया- बीकानेरी मूंगफली का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। बीकानेर से मूंगफली चीन को एक्सपोर्ट होती है। बीकानेर से प्रोसेसिंग के बाद मूंगफली गुजरात भेजी जाती है। वहां से चीनी व्यापारी मूंगफली की खरीदारी करते हैं। पहले गुजरात के व्यापारी बीकानेर आकर मूंगफली की खरीद करते थे। मूंगफली को गुजरात ले जाकर प्रोसेसिंग यूनिट के जरिए अच्छा दाना निकालकर विदेश सप्लाई करते थे। लेकिन अब बीकानेर में ही एक दर्जन से ज्यादा यूनिट लग गई हैं। आस-पास के इलाके को भी मिला तों 100 से ज्यादा प्रोसेसिंग यूनिट्स हो गई हैं। उन्होंने बताया- मंडी से निर्यातक बेहतर मूंगफली की खरीद करते हैं। मंडी से मूंगफली प्रोसेसिंग यूनिट में आती है। इसे गोदाम में स्टॉक किया जाता है। मूंगफली की अच्छे से क्लीनिंग की जाती है। मूंगफली के छिलके, कंकर और मिट्टी अलग कर दिए जाते हैं। बारीक किरकर भी साफ की जाती है। अब दानों को पानी में भिगोया जाता है। यह दाने का मॉइश्चर मेंटेन करने के लिए किया जाता है। इसके बाद गिरी का छिलका अलग किया जाता है। मजदूर हाथ से अच्छे दानों की अलग से छंटाई करते हैं। इसके बाद मशीन से फाइनल छंटाई कर समान बेहतर क्वालिटी के दानों को अलग किया जाता है। यहां से अच्छे दाने की पैकिंग कर माल विदेश भेजा जाता है। हालांकि माल विदेश जाने का रास्ता गुजरात से होकर ही निकलता है। इसलिए प्रोसेस होकर मूंगफली कंटेनरों से गुजरात जाती है। बृजमोहन चांडक ने कहा कि राज्य सरकार अगर कोशिश करे तो बीकानेर की मूंगफली बीकानेर से अलग-अलग पोर्ट के जरिए सीधे विदेश जा सकती है। इससे स्थानीय व्यापारियों को अधिक मुनाफा होगा। उत्पादन में गुजरात को पछाड़ रहा बीकानेर बृजमोहन चांडक ने बताया- देश में मूंगफली उत्पादन के मामले में अब बीकानेर जिला सबसे ऊंचे पायदान पर है। अब तक गुजरात के राजकोट में देश की सर्वाधिक मूंगफली का उत्पादन हो रहा था। लेकिन अब बीकानेर आगे निकल गया है। बीकानेर में पिछले साल 55 लाख क्विंटल मूंगफली उत्पादन हुआ था। इस बार इससे ज्यादा उत्पादन का रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है। इस बार राजकोट में कुल उत्पादन 53 लाख क्विंटल रहा है, जबकि बीकानेर में करीब 40-45 लाख क्विंटल का कारोबार हो चुका है। इस बार मूंगफली के बीज, फुटकर विक्रेताओं, ऑयल व गोटा मिलों के जरिए सीधी खरीद 10 से 15 लाख क्विंटल रहने का अनुमान है। मंडी व्यापारी बोले- इस बार प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ा बीकानेर अनाज मंडी के पूर्व अध्यक्ष और व्यापारी मोतीलाल सेठिया ने बताया- बीकानेर में नई अनाज मंडी गंगानगर रोड पर है। दीपावली के बाद से मंडी में मूंगफली की आवक शुरू हो जाती है। शुरू में आवक धीमी होती है। लेकिन अब एक लाख बोरियों का ऑक्शन रोजाना हो रहा है। मंडी में सवा लाख बोरियां तक रोजाना आ रही हैं। लगभग 25 हजार बोरियां ऑक्शन से छूट जाती हैं। इन्हें अगले दिन ऑक्शन में शामिल किया जाता है। मंडी में किसानों को मूंगफली लाने और बेचने में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक मंडी के सभी गेट खुले रहते हैं। इस बार बारिश अच्छी रही। मूंगफली की गिरी (दाना) गुलाबी है। यह अच्छी क्वालिटी की पहचान है। इस बार खेतों में मूंगफली की 8 से 12 क्विंटल प्रति बीघा पैदावार हो रही है। बीकानेर में तेल और दाने की 100 से अधिक मिले हैं। इन दिनों पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान से डिमांड कम आ रही है। इसकी वजह पड़ोसी देशों से भारत के संबंधों में आ रही तल्खी हो सकती है। हालांकि यूरोपीय देशों, चीन और मलेशिया से डिमांड बनी हुई है। सर्दी बढ़ने के साथ डिमांड भी बढ़ेगी। मूंगफली के कारण किसान, व्यापारी, बड़े कारोबारी सभी को फायदा हो रहा है। सरकार को भी जीएसटी और अन्य टैक्स से करोड़ों को राजस्व मिल रहा है। करीब 3 महीने तक बाजार में मूंगफली छायी रहेगी। इस बार मिल में जाने वाली मूंगफली का भाव 4500 से 4800 प्रति क्विंटल है। वहीं मध्यम क्वालिटी की मूंगफली का भाव 5200 से 5500 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहा है और बेहतर क्वालिटी की गुलाबी रंग की मूंगफली की भाव 6500 से 7000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच जा रहा है। यह मूंगफली सिकाई के लिए जाती है। उन्होंने बताया- बीकानेर का पीनट (मूंगफली का दाना) बिजनेस भुजिया-पापड इंडस्ट्री से बराबर या ऊपर है। नमकीन और स्नेक्स बनानी वाली बड़ी कंपनियां बीकानेर से ही मूंगफली खरीदती हैं। बीकानेर के 70 किलोमीटर के घेरे में 4 करोड़ बोरी मूंगफली का उत्पादन इस सीजन में होने का अनुमान है। मूंगफली, इसका दाना, तेल, खली, पाउडर, टुकड़ी सब इस्तेमाल होता है। इसका चूरा कुपोषित बच्चों के लिए प्रोडक्ट बनाने में इस्तेमाल होता है। उन्होंने बताया- 2023 में मूंगफली की फसल कमजोर थी। इससे पहले 2022 में बीकानेर अनाज मंडी में एक करोड़ बोरी से अधिक मूंगफली का कारोबार हुआ था। साल 2024 में 2022 का रिकॉर्ड पीछे छूट गया है। किसान बोले- अच्छी बारिश के कारण उत्पादन बढ़ा बीकानेर के खाजूवाला के किसान नरेंद्र आर्य ने बताया- जिले में बीकानेर, खाजूवाला, लूणकरनसर, श्रीडूंगरगढ़, नोखा, बज्जू क्षेत्र में मूंगफली की खेती होती है। जिले में मूंगफली के बुवाई क्षेत्र की बात करें तो साल 2022-23 में 2 लाख 73 हजार हेक्टेयर में किसानों ने बुवाई की थी। जबकि साल 2023-24 में 2 लाख 80 हजार हेक्टेयर में बुवाई की गई। इस तरह बुवाई क्षेत्र में 7 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी रही। समय पर बारिश, कीट या व्याधि का प्रकोप न होने के कारण इस सीजन में प्रति हेक्टेयर डेढ़ से दो क्विंटल उत्पादन बढ़ा है। इस बार प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 2100 से 2200 क्विंटल रहा है। भारी डिमांड और बंपर पैदावार के कारण किसानों को भी फायदा मिल रहा है। किसान ने बताया- इस बार एक बीघा में 10 क्विंटल मूंगफली हुई है। मूंगफली की फसल में कई बार सिंचाई करनी होती है। प्रति बीघा फसल में पांच से दस बार पानी देना पड़ता है। इस बार मेहनत का उचित फल मिल रहा है। इस बार मानसून में बीकानेर के ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर बारिश हुई। कोलायत, श्रीडूंगरगढ़, नोखा व खाजूवाला क्षेत्र में अच्छी बारिश रही। नहरी पानी ने भी पूरा साथ दिया। ऐसे में किसानों ने समय पर मूंगफली की बुवाई की। परिणाम ये है कि मंडियों में मूंगफली रखने की जगह नहीं है। किसान ने बताया- बीकानेर में मूंगफली के बीजों की बुवाई बारिश के शुरू होने के साथ ही की जाती है। इसकी बुवाई का सबसे उपयुक्त समय मध्य जून से मध्य जुलाई का होता है। यह भी पढ़ें राजस्थान का मिर्ची वाला गांव, हर किसान परिवार लखपति:80 साल से नहीं बदला ट्रेंड, देशभर में हैं यहां की चिली की डिमांड बांसवाड़ा जिले का एक गांव अपनी मिर्ची के लिए देशभर में पहचान रखता है। यहां की मिर्चियों का तीखापन खाने के स्वाद को और बढ़ा देता है। इसलिए दूसरे राज्यों से भी खरीददार यहां आते हैं। फाइव स्टार होटल्स, रेस्टोरेंट के शेफ भी यहां की मिर्ची को खासा पसंद करते हैं। हम बात कर रहे हैं मसोटिया मिर्च की। (पढ़ें पूरी खबर)


