स्थान आरयू के पीजी जनजातीय भाषा विभाग का डॉ. रामदयाल मुंडा अखरा। समय दिन के 11.30 बजे हैं। अवसर सरहुल महोत्सव। अखरा खचाखच भरा हुआ है। सखुआ के पेड़ के नीचे पाहन विधिवत पूजा कर रहे हैं, जिसमें वीसी डॉ. अजीत सिन्हा समेत अन्य विवि अधिकारी शामिल होते हैं। स्व. डॉ. रामदयाल मुंडा द्वारा रचित सरहुल पूजा मंत्र श्रद्धा के साथ पढ़ा जा रहा है। अतिथियों का स्वागत एचओडी डॉ. उमेशनंद तिवारी ने किया। नागपुरी, खड़िया, हो, संथाली, कुडुख समेत 9 भाषाओं के स्टूडेंट्स ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। वीसी ने कहा कि सरहुल पर्व में जल, जंगल, जमीन की पूजा की जाती है। प्रकृति की सुरक्षा से ही मानव जाति सुरक्षित रह सकती है। वीसी ने बजाया मांदर,छात्रों के साथ झूमे, बोले- प्रकृति की सुरक्षा से ही मानव जाति सुरक्षित आरयू व डीएसपीएमयू के टीआरएल विभाग में सरहुल महोत्सव मनाया गया, 9 विभाग के छात्र शामिल हुए सिटी रिपोर्टर | रांची डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि के प्रांगण में सरहुल महोत्सव का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के विभिन्न जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा विभागों के छात्र-शिक्षक इसमें शामिल हुए। अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि सरहुल झारखंड का सबसे बड़ा नृत्य उत्सव है। विशिष्ट अतिथिगणों में झारखंड ओपन यूनिवर्सिटी, के वीसी डॉ. टीएन साहू, पूर्व वीसी डॉ. सत्यनारायण मुंडा, डॉ यूसी मेहता, पद्मश्री मुकुंद नायक, पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख व डॉ. सर्वोत्तम कुमार, पीआरओ डॉ. राजेश कुमार सिंह मौजूद रहे। स्वागत भाषण डॉ. विनोद कुमार ने दिया। मंच संचालन डॉ. जय किशोर मंगल और डॉ. डुमनी माई मुर्मू ने किया। चलना नृत्य, बोलना संगीत : वक्ताओं ने बताया कि झारखंड में चलना नृत्य व बोलना संगीत है। सरहुल में साल या सखुआ वृक्ष पर फूल चढ़ाए जाते हैं। यह जीवन देने के साथ जीवन बचाता भी है। मांदर की थाप पर झूमे : वीसी समेत अन्य विवि अधिकारियों ने मांदर की थाप पर खूब झूमे। संचालन डॉ. उमेश नंद तिवारी और डॉ किशोर सुरीन ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर डॉ. टीएन साहू, डॉ. मुकुंद मेहता, मेघनाथ, डॉ. हरि उरांव, डॉ. विकास कुमार, डॉ. गुरु चरण साहू, डॉ अरुण सिंह, डॉ अजय सिंह, डॉ निरंजन महतो मौजूद थे। स्टूडेंट्स भी झूमे


