स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआई) में मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। इंस्टीट्यूट में हड़ताल के बाद भले ही काम सही होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि पूरा अस्पताल गंदगी से अटा हुआ है और दुर्गंध मार रहा है। वार्ड, ओटी और गैलेरी में संक्रमित चादरें, सीरिंज व दवाइयों के रेपर पड़े हुए हैं, लेकिन उन्हें ना तो हटाया गया और ना ही सफाई की गई। ऐसे में अस्पताल में मरीजों को संक्रमण का खतरा बना हुआ है। अस्पताल प्रशासन की ओर से सख्ती के बावजूद सफाई नहीं होने से पूरे इंस्टीट्यूट में काम करना और इलाज कराना मुश्किल हो गया है। वहीं इंस्टीट्यूट प्रशासन के निर्देश के बाद पुराने कर्मियों को काम से हटा दिया गया और नए लगाने की बात कही गई। लेकिन जितने नए कर्मी लगाए गए, वे पर्याप्त नहीं थे और इंस्टीट्यूट में सफाई नहीं हो सकी। उधर, जिन कर्मियों को हटाया गया है उन्हें दो महीने की सेलेरी भी नहीं दी गई और उन्होंने अस्पताल में नाराजगी जताई। इन कर्मियों का कहना था कि पहले उन्हें सेलेरी देने के लिए कहा गया लेकिन अब मना कर दिया गया है। वे किराए के मकानों में रहते हैं और अब तक किराया भी नहीं दिया। ऐसे में उनके घर से निकलने की नौबत आ गई है। मामले में अस्पताल अधीक्षक डॉ. संदीप जसूजा ने कहा कि हमनें नए व्यक्ति को काम की जिम्मेदारी सौंपी है। अगले दिनों में सब कुछ सही किया जाएगा।


