दिव्यांग बुजुर्ग का रोडवेज ने काटा 75 रुपए का टिकट:सीएम और राज्यपाल से लगाई न्याय की गुहार; खर्च हुई 15 हजार की जमापूंजी

दौसा के 80 साल के रामजीलाल ने पाई-पाई करके 15 हजार रुपए जोड़े थे। वे इन पैसों से अपनी आंखों का इलाज करवाना चाहते थे, जिससे उन्हें बुजुर्गावस्था में ठीक से दिखाई दे सके। लेकिन रोडवेज के एक सफर ने उनकी जमापूंजी को खत्म कर दिया। वे अब न्याय के लिए एक से दूसरे दफ्तर,एक शहर से दूसरे शहर भटक रहे हैं। मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन करीब सवा साल में भी न्याय नहीं मिल सका। यह है पूरा मामला
दिव्यांग रामजीलाल 6 जनवरी 2024 को राजस्थान रोडवेज की बस से दौसा से जयपुर आ रहे थे। कंडक्टर ने जब उनसे किराया मांगा तो उन्होंने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) की तरफ से जारी विशेष योग्यजन पास (स्मार्ट कार्ड) पास दिखाया। इस कार्ड से निशुल्क यात्रा की करने की अनुमति मिलती है। लेकिन बस कडंक्टर ने रामजीलाल से अभद्रता की और उनसे 75 रुपए लेकर टिकट दे दी। वृद्धावस्था पेंशन से जीवन यापन करने वाले रामजीलाल ने कंडक्टर द्वारा की गई अभद्रता और जबरन टिकट देने की शिकायत निगम के दौसा आगार के प्रबंधक से की और कार्रवाई की मांग की। इस पर उन्हें सत्यापन के लिए कार्यालय में बुलाया गया तो वे 21 फरवरी 2024 को कार्यालय में हाजिर हुए। इस पर उन्हें अगले दिन आने की बात कहकर वापस भेज दिया गया। रोडवेज कार्यालय में जबरन साइन करवाने का आरोप
दिव्यांग रामजीलाल का कहना है कि जब वे अगले दिन निगम के कार्यालय में गए तो उनसे जबरन कुछ कागजात पर साइन करवाए गए। लेकिन कंडक्टर सत्यापन के लिए नहीं आया। इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में डाक से दस्तावेज भेजकर शिकायत क जिस पर उन्हें निगम द्वारा जांच करने का पत्र प्राप्त हुआ। इसके बाद वे जयपुर के चौमूं हाउस स्थित परिवहन निगम के मुख्यालय में पहुंचे और संयुक्त महाप्रबंधक दीपक खंडेलवाल के सामने अपनी शिकायत पेश की लेकिन कंडक्टर फिर जांच के लिए नहीं आया। इसके बाद रामजीलाल ने विभाग के अधिकारियों,विभाग के मंत्री प्रेमचंद बैरवा,डिप्टी सीएम दीया कुमारी,राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े को अपनी शिकायत के दस्तावेज भेजे लेकिन कंडक्टर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 15 हजार की जमा रकम खर्च हुई
रामजीलाल ने मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी शिकायत के लिए दस्तावेज दिए, लेकिन यहां भी उन्हें निराशा हाथ लगी। न्याय की इस लड़ाई में रामजीलाल की इलाज के लिए जमा की गई 15 हजार की जमा रकम खर्च हो गई। बुजुर्ग रामजीलाल का कहना है कि वे बीपीएल श्रेणी में आते हैं। पति-पत्नी दोनों वृद्धावस्था पेंशन के सहारे जीवन यापन करते हैं। लेकिन न्याय की लड़ाई लड़ते हुए करीब 1 साल 3 माह हो गए और अब भी इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *