राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तलब किया है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने देवीलाल गुर्जर की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए डीजीपी को 7 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता ने अपनी 15 साल की नाबालिग बेटी को तलाशने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर बुधवार को सुनवाई के दौरान डीसीपी ईस्ट तेजस्वनी गौत्तम अदालत में पेश हुईं। उन्होंने इस मामले से जुड़ी तथ्यात्मक रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी। रिपोर्ट में कोर्ट के सामने आया कि पुलिस ने मामला दर्ज होने के बाद डेढ़ महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की। नाबालिगों के मामले में गंभीर लापरवाही
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा- पुलिस नाबालिग की गुमशुदगी के मामले में गंभीर लापरवाही बरती है। मामले में भी एफआईआर दर्ज होने के बाद डेढ़ महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा- अगर इस तरह के मामलों में पुलिस मामला दर्ज होने के दो-तीन दिन में ही कार्रवाई शुरू कर दे तो बच्चियों की रिकवरी बढ़ सकती है। ऐसे में डीजीपी कोर्ट में पेश होकर बताएं कि नाबालिग बच्चों की गुमशुदगी के मामले में पुलिस किस तरह के मैकेनिज्म को फॉलो करती है। परिजन चक्कर लगाते रहे, कार्रवाई नहीं हुई
याचिकाकर्ता के वकील नरेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा- परिजनों ने नाबालिग के अपहरण का मामला 5 फरवरी को प्रतापनगर थाने में दर्ज कराया था। परिजनों ने पड़ोस के गांव में रहने वाले युवक के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने डेढ़ महीने तक कोई जांच नहीं की। गुर्जर ने बताया- परिजन रोज थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। जब हाईकोर्ट में दायर याचिका पर नोटिस जारी हुए, तब पुलिस ने 10 मार्च को आरोपी के परिजनों के बयान दर्ज किए। यह बात आज कोर्ट के सामने आई तो कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई।


