बालोद का गंगासागर तालाब नवरात्रि में भी गंदा:यहां निस्तारी तक संभव नहीं; लाखों खर्च कर भी संवार नहीं पा रहे जिम्मेदार

छत्तीसगढ़ के बालोद का गंगा सागर तालाब नवरात्रि पर्व पर भी गंदा है। लोग इसे छूने से भी कतरा रहे हैं। गंदगी इतनी फैल चुकी है कि यहां निस्तारी करना भी संभव नहीं रहा। राज्य स्थापना के बाद गंगासागर तालाब को छत्तीसगढ़ का मॉडल तालाब माना जाता था, लेकिन अब इसकी पहचान खत्म होती जा रही है। बीते साल सफाई और समतलीकरण के लिए लगभग 12 लाख रुपए खर्च किए गए, बावजूद इसके तालाब की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। पिछले 10 साल में 56 लाख खर्च, फिर भी बेकार नगर पालिका प्रशासन ने बीते 10 सालों में तालाब की सफाई और सौंदर्यीकरण पर लगभग 56 लाख रुपए खर्च किए हैं, लेकिन तालाब अब भी अनुपयोगी बना हुआ है। नगर पालिका के सीएमओ सौरभ शर्मा सहित अन्य अफसरों और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या की जानकारी है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। गर्मी में हुआ था तालाब की सफाई का दावा पिछले साल गर्मी के मौसम में नगर पालिका के अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने सफाई अभियान चलाया था। गंदा पानी और कीचड़ बाहर निकाला गया था। जिसके बाद मानसूनी बारिश और गोंदली बांध से पानी भरा गया था। 2016 में सबसे अधिक 39 लाख खर्च हुए साल 2016 में तालाब के सौंदर्यीकरण, सफाई और नाली निर्माण के लिए 39 लाख रुपए खर्च किए गए थे। इससे पहले 2002 और 2016 में भी गर्मी के दौरान सफाई हुई थी और गोंदली जलाशय से पानी भरा गया था। फिलहाल गोंदली जलाशय का गेट बंद है और नहर लाइनिंग कार्य के चलते पानी कब पहुंचेगा, इसकी कोई जानकारी नहीं है। गंगासागर तालाब की खासियत जल्द भरा जाएगा तालाब, अध्यक्ष ने दिया आश्वासन नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी ने कहा कि गोंदली बांध का गेट खोलने के लिए सिंचाई विभाग से चर्चा हो चुकी है। जल्द ही तालाब में पानी भरा जाएगा और इसे फिर से उपयोगी बनाया जाएगा। प्रतिभा ने कहा बजट में इसे संवारने के लिए विशेष पहल की जाएगी। हालांकि, नगर पालिका के सीएमओ सौरभ शर्मा, जो पहले तालाब को सुधारने की प्लानिंग का दावा कर रहे थे। अब इस पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। पार्षद निधि से हुई थी सफाई, लेकिन समस्या बरकरार पार्षद विनोद बंटी शर्मा ने बताया कि पिछले साल सफाई के लिए पार्षद निधि की राशि का उपयोग किया गया था। इसके अलावा नगर पालिका ने भी राशि खर्च की थी। पानी की कमी के कारण वार्ड का वाटर लेवल गिर रहा है। जिससे बोरवेल में पानी कम मात्रा में आ रहा है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

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