भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा ब्लॉक के माहरापारा में गर्मी आते ही 84 परिवारों की मुसीबत बढ़ गई है। ब्लॉक मुख्यालय के इस गांव में ग्रामीणों के लिए 20 से ज्यादा हैंडपंप पीएचई और एनएमडीसी खोद चुका है पर सब फेल हो चुके हैं। स्थित यह है कि सुबह 4 बजे से हैंडपंप में बर्तनों की लाइन लग जाती है। मुश्किल से 500 लीटर पानी हैंडपंप से निकलता है। इसके बाद पानी के लिए आने वाली महिलाओं को खाली बर्तन लेकर लौटना पड़ता है। माहरापारा कुआकोंडा ब्लॉक का ड्राई जोन गांव है, इस गांव में पानी की समस्या से पीएचई विभाग ग्रामीणों को निजात नहीं दिला पा रहा है। के लिए 20 से ज्यादा हैंडपंप पर सभी फेल। आधा किलोमीटर दूर से पाइप लाइन से पानी लाने की योजना भी नहीं हुई सफल। दंतेवाड़ा में दो ड्राई जोन गांव, दोनों की समस्या नहीं हो रही हल: जिले में अब तक दो गांव कटेकल्याण का दूधिरास और कुआकोंडा ब्लॉक का माहरापारा गांव ड्राई जोन है, जिसकी समस्या का समाधान पीएचई नहीं ढूंढ पा रहा है। दूधिरास में भी करोड़ों खर्च करने के बाद पानी नहीं आ रहा है। माहरापारा में भी यही स्थित पिछले कई सालों से निर्मित है। दंतेवाड़ा। पानी नहीं मिलने से खाली बर्तन लेकर जाती महिलाएं। माहरापारा के सभी घरों में जल जीवन मिशन के तहत घरों के सामने नल लगे हुए हैं पर इनमें पानी नहीं आता है। गांव में नल तो लगा दिए पर पानी कहां से आएगा, इसको लेकर कोई योजना नहीं बनाई गई। महिलाओं ने बताया सुबह से पानी के लिए गांव के अलग-अलग हैंडपंप के चक्कर काटना पड़ता है पर पानी नहीं मिलता है। आधा किलोमीटर दूर ट्यूबवेल खोद पानी सप्लाई की योजना भी फेल माहरापारा गांव को पानी की समस्या से निजात दिलाने पिछले कई सालों से यहां हैंडपंप और बोर खनन किए जा रहे हैं पर पीएचई विभाग को इसमें सफलता नहीं मिल पा रही है। आधा किलोमीटर दूर भी ट्यूबवेल खोदकर गांव में पाइपलाइन बिछाकर पानी सप्लाई की योजना फेल हो गई है। गांव ड्राई जोन होने के बावजूद यहां लाखों रुपए हर साल सिर्फ पानी के नाम पर फूंके जा रहे हैं, मगर ग्रामीणों को समस्या से निजात नहीं मिल रही है।


