उदयपुर के भींडर थाना क्षेत्र में एक पति-पत्नी से नवजात बच्चा मिला। दावा है कि ये बच्चा उनका नहीं था। शिकायत मिलने पर जब बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की टीम मौके पर पहुंची तो दंपति के सारे दावों की पोल खुल गई। दंपति के पहले ही चार संतान हैं और वह नवजात को भी अपना बच्चा होने का दावा कर रहे थे। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष यशोदा पनिया ने बताया- प्राथमिक जांच में सामने आया कि ये बच्चा दंपति का नहीं है। ऐसे में बच्चे को अपने कब्जे में लिया और शिशु गृह में भर्ती कराया है। उदयपुर एसपी योगेश गोयल को पत्र लिखकर महिला ललिता चंदेल(45) और उसके पति भेरूलाल चंदेल(65) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने के लिए कहा है। भेरूलाल झाड़ोल में चिकित्सा विभाग में साल 2019 में सेवानिवृत कर्मचारी है। ममता कार्ड नहीं मिला, आसपडोस में कभी गर्भवती नहीं देखा
अध्यक्ष यशोदा पनिया ने बताया- दंपति से पूछताछ की गई। महिला की डिलीवरी के सवाल पर वे बोले, घर में ही हुई। महिला पहले तो बच्चे का ममता कार्ड होने और टीकाकरण कार्ड होने दावा करती रही। जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को बुलाकर जानकारी ली गई तो पता लगा कि बच्चे का कभी ममता कार्ड नहीं बना। न ही उसका टीकाकरण हुआ। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने बताया- पड़ोसियों से पूछताछ में पता लगा कि उन्होंने महिला को कभी गर्भवती नहीं देखा। महिला की मेडिकल जांच और बच्चे का डीएनए टेस्ट होगा
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने बताया- उन्होंने आरएनटी मेडिकल कॉलेज और भींडर थाना पुलिस को निर्देश दिए हैं कि मेडिकल बोर्ड बैठाकर महिला की मेडिकल जांच कराई जाए। जिसमें ये पता लगे कि उसके डिलीवरी हुई है या नहीं। साथ ही बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया जाए। ये पता लगाया जाएगा कि आखिर ये बच्चा किसका है। इसके पीछे बच्चों की खरीद-फरोख्त या फिर कोई अवैध रूप से की गई साजिश तो नहीं है।


