भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर से विशाखापट्नम तक बनने वाली सड़क पर अभनपुर के तीन नहीं बल्कि सात गांवों के किसानों का करीब 164 करोड़ से ज्यादा के मुआवजे का घोटाला किया गया है। किसानों के 170 खातों से लेनदेन किया। फिर उनके खातों को बंद कर दिया। भांडा फूटने के बाद पांच अफसरों और कर्मचारियों को सस्पेंड कर जांच की जा रही है।
दैनिक भास्कर की टीम को दो हफ्ते की पड़ताल के बाद कई ऐसे दस्तावेज मिले जिससे ये राज खुला कि मुआवजे के पैसे सस्पेंड अफसरों के रिश्तेदारों के खातों और उनकी कंपनियों में भी ट्रांसफर किए गए हैं। एक अफसर की पत्नी ने फर्जीवाड़ा करने वालों के साथ कंपनी बनाई। उस कंपनी के नाम पर नवा रायपुर में होटल भी खोला गया है। मुआवजे के पैसों से ही एक रसूखदार की कंपनी के 37-37 लाख के शेयर खरीदे गए हैं। बाद में यही पैसा अफसरों और फर्जीवाड़ा करने वालों के खातों में ट्रांसफर किया गया है, जबकि किसानों को पता ही नहीं चला कि उनके खाते में कब कितना पैसा आया। भास्कर ने किसानों से मुलाकात की तो पता चला कि तीन नहीं बल्कि सात गांव टोकरो, उमेतरा, नायकबांधा, झांकी, भेलवाडीह, फरला और सातपारा में करीब 65.2832 हेक्टेयर जमीन में करोड़ों के मुआवजे का खेल किया गया है।
भास्कर टीम ने गांवों में पहुंचकर किसानों से सच्चाई जानी। ज्यादातर ने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें ज्यादा मुआवजा दिलाने के नाम पर बैंक दस्तावेजों में पहले से ही हस्ताक्षर करवा लिए थे। इस तरह किसानों को झांसा देकर उनसे चेक, आरीटीजीएस और एनएफआईटी के फॉर्म साइन करवा लिए गए थे। इसलिए फर्जीवाड़ा करने वालों को रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई और किसानों को पता ही नहीं चला कि उनके खाते में कब कितना पैसा आया और निकाल लिया गया। घोटालेबाज ही आपरेट कर रहे थे खाते किसानों का मुआवजा हड़पने पूरी प्लानिंग के साथ काम किया गया। इसके लिए किसानों का एक भी खाता सरकारी बैंकों में नहीं खुलवाया गया। सभी 170 खाते आईसीआईसीआई, एक्सिस और इंड्सलैंड बैंक में खुलवाए गए। सबसे ज्यादा खाते इंड्सलैंड बैंक में खुलवाए गए। खाते रायपुर के अलावा धमतरी और महासमुंद में खुलवाए गए। पड़ताल में पता चला कि ये सभी खाते बंद कर दिए गए हैं। खातों में रकम जमा होने के आधे-एक घंटे के भीतर ही दूसरे निजी खातों में ट्रांसफर की गई। इस तरह मुआवजे की पूरी रकम आते ही खाते बंद करवा दिए गए। खाता क्लोज से पहले ही किसानों से साइन ले लिया गया था। अब जानिए क्या है पूरा मामला रायपुर से विशाखापट्टनम तक करीब 463 किमी लंबी नई फोरलेन सड़क बनाई जा रही है। छत्तीसगढ़ में 124 किमी सड़क तीन कंपनियां बना रही हैं। यह सड़क नवा रायपुर से भी होकर गुजरेगी। इसलिए यहां सड़क के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया। जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे का घोटाला किया गया। अधिग्रहण नियमों के अनुसार गांवों में 500 वर्गमीटर से कम जमीन है तो उसका मुआवजा ज्यादा मिलता है। जमीन 500 वर्गमीटर से ज्यादा है तो पैसा कम मिलता है। उदाहरण के तौर पर एक एकड़ जमीन का मुआवजा 20 लाख होगा। इसे टुकडों में बांटकर 500 वर्गमीटर से कम कर दिया जाए तो मुआवजा 1 करोड़ हो जाएगा। लोग बोले- सीबीआई को दी जानकारी स्वामी बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के संचालक नरेंद्र पारख ने बताया कि अभनपुर के उरला गांव नहर के पास उनकी 88 डिसमिल जमीन है। इसमें 39 डिसमिल जमीन का अधिग्रहण एनएचएआई ने किया है। भुगतान पत्रक में 1.36 करोड़ का मुआवजा बना। लेकिन इनकी जमीन का मुआवजा किसी हृदय लाल गिलहरे के नाम पर कर दिया गया। उसने बैंक से पूरा पैसा निकालकर खाता बंद कर दिया है। उन्होंने इसकी शिकायत सीबीआई में की गई है। अमित पाण्डेय ने बताया कि उनके पास 1.80 लाख स्क्वायर फीट जमीन थी। उन्हें 29 करोड़ मुआवजा मिलना था, लेकिन 17 करोड़ ही मिले। बाकी 12 करोड़ कहां गए उन्हें पता नहीं। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का काम मुआवजे के विवाद की वजह से काम रूका था। अब शुरू हो गया है। घोटाले की जांच चल रही है। इससे भी देरी हुई है।
एमटी अत्तरदे, रीजनल ऑफिसर एनएचएआई
रायपुर-विशाखापट्टनम परियोजना में जिनकी जमीन है उनको मुआवजा न मिलकर दूसरों को मिल गया है। इसकी जांच जारी है। कुछ अफसरों पर कार्रवाई भी हो गई है।
रवि सिंह एसडीएम, अभनपुर


