जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 नए अंदाज के साथ बटोरेगा सुर्खियां:300 से ज्यादा साहित्यकार फेस्ट का बनेंगे हिस्सा, गांधी और नेहरू पर भी होंगे खास सेशन

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल अपने 18वें संस्करण के लिए तैयार है। 30 जनवरी से 3 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाला यह उत्सव होटल क्लार्क्स आमेर, जयपुर में साहित्य प्रेमियों और विद्वानों को एक मंच पर लाएगा। टीमवर्क आर्ट्स द्वारा प्रोड्यूस किए गए इस उत्सव ने संवाद सत्रों की सूची जारी की है, जो एक बार फिर साहित्य, विचार और संवाद के माध्यम से गहरी दृष्टि प्रदान करेंगे। इस संस्करण में 300 से अधिक प्रतिष्ठित वक्ताओं का भाग लेना तय है। उत्सव में वाद-विवाद, परिचर्चा और कहानियों के माध्यम से विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। घोषित प्रमुख सत्र
नोबेल पुरस्कार विजेता एस्थर डुफ्लो और चित्रकार चेयेन ओलिवर युवा पाठकों के लिए अर्थव्यवस्था की अवधारणाओं को सुलभ और प्रेरक तरीके से प्रस्तुत करेंगे। अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता गीतांजलि श्री अपने उपन्यास और उसके अनुवाद ‘अवर सिटी दैट ईयर’ की प्रेरणा पर चर्चा करेंगी। प्रसिद्ध नाटककार डेविड हेयर अपनी रचनात्मक प्रक्रिया और ब्रिटेन के थिएटर पर अपने प्रभाव पर बात करेंगे। नेहरू युग की विदेश नीति और प्रारंभिक राजनयिकों पर चर्चा होगी, जिसमें टीसीए राघवन, नवतेज सरना, और अन्य प्रतिष्ठित नाम शामिल होंगे। आंद्रे एसीमैन प्रेम, स्मृति और पहचान की गहन भावनाओं को साझा करेंगे। जेनी एर्पेनबेक की यह कहानी प्रेम, राजनीति और परिवर्तनशील समय के बीच मानव संबंधों की जटिलताओं को उजागर करेगी। नोबेल पुरस्कार विजेता वेंकी रामकृष्णन मानव अस्तित्व और अमरता की खोज पर चर्चा करेंगे। अमोल पालेकर अपने जीवन और सिनेमा पर दृष्टिकोण साझा करेंगे। गोपालकृष्ण गांधी और डेनियल टॉल्सटॉय इन दो महान विचारकों की पत्राचार पर चर्चा करेंगे। ​​​​​​​ फेस्टिवल की सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा कि यह उत्सव हमारी दुनिया की बदलती वास्तविकताओं पर विचार-विमर्श करने और बेहतर भविष्य के लिए प्रेरणा प्रदान करने का मंच है। ​​​​​सह-निदेशक ​​विलियम डेलरिंपल ने कहा कि हमने दुनिया के सबसे विविध स्वरों और कहानियों को एकत्रित किया है। यह विचारों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का उत्सव है। टीमवर्क आर्ट्स के डायरेक्टर संजय के. रॉय ने कहा कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल संवाद एवं कहानी कहने का एक माध्यम बना हुआ है, जो समझ एवं सहानुभूति पर साहित्य के गहन प्रभाव को दर्शाता है। प्रत्येक संस्करण एक जीवंत मंच के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करता है, जहां विचार एवं प्रतिनिधि स्वर मानवता की साझा भावना को बढ़ाने के लिए एक साथ आते हैं।

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