राजगढ़ में शुक्रवार को बाल श्रम अधिनियम के तहत गठित टास्क फोर्स ने तीन दुकानों पर कार्रवाई करते हुए नाबालिग बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया। टीम ने सूचना और निरीक्षण के आधार पर तीनों दुकानों पर छापेमारी की। इस दौरान बाल श्रम अधिनियम का उल्लंघन करते हुए नाबालिग बच्चों को काम करते पाया गया। दुकानदारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। अभियान में श्रम निरीक्षक मनोज चौहान, महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी विक्रम सिंह ठाकुर, विशेष किशोर पुलिस इकाई के अधिकारी रमेश चंद भिलाला, अहिंसा वेलफेयर सोसाइटी और जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन की सदस्य रजनी प्रजापति और निकिता मेवाड़े शामिल रही। बाल श्रम अधिनियम के प्रावधान बाल श्रम अधिनियम 1986 की धारा 3 के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी कार्य में नियोजित करना प्रतिबंधित है। वहीं, धारा 3 ‘क’ के अंतर्गत 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक कार्यों में नियोजित करना कानूनन अपराध है। दोषी पाए जाने पर 20,000 से 50,000 रुपए तक का जुर्माना और 2 साल तक की सजा का प्रावधान है।


