रिटायर्ड पीसीसीएफ और वरिष्ठ पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. डीएन पांडे ने कहा है कि जैव विविधता से समृद्ध राजस्थान के लिए अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट हमारे सुखद भविष्य की महत्वाकांक्षी परियोजना है। ये प्रकृति और प्राकृतिक तंत्रों के संरक्षण की बड़ी शुरुआत है। प्रोजेक्ट में पौधरोपण के साथ हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता इकोसिस्टम को बचाने कि हो ताकि और बदतर स्थितियां पैदा न होने पाएं। डॉ. पांडे अरण्य भवन सभागार में रविवार को हुई अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट और नेचुरल क्लाइमेट सॉल्यूशन पर हुई कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से इस प्रोजेक्ट के कई बिंदुओं के प्रदेश की अन्य राज्यों की तुलना में स्थिति, जैव विविधता को बचाने के लिए चुनौतियां और हमारे दायित्वों के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि देश के 6.6 लाख गांवों में 15 लाख से अधिक तालाब हैं, जो हमारे इको सिस्टम को जीवनदान दे रहे हैं। शुरुआत में ग्रीन पीपल सोसाइटी के अध्यक्ष और रिटायर्ड सीसीएफ राहुल भटनागर ने सोसायटी द्वारा किए कामों की जानकारी दी। इस मौके पर सोसायटी उपाध्यक्ष और रिटायर्ड आईएएस विक्रमसिंह सहित सोसायटी सदस्यों ने भी विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। अफ्रीका की ‘ग्रेट ग्रीन वॉल’ परियोजना से प्रेरित है यह प्रोजेक्ट
डॉ. पांडे ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय का अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट अफ्रीका की ‘ग्रेट ग्रीन वॉल’ परियोजना से प्रेरित है। इसका उद्देश्य उन पहाड़ियों पर हरित आवरण को बहाल करना है, जो थार से दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत तक रेगिस्तान जैसी स्थितियों के विस्तार को रोकने वाली एकमात्र बाधा है।


