कवर्धा| गौ-सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। इसे चरितार्थ कर रही है नगर की बेजुबां सेवा समिति। सड़क पर कहीं भी घायल गायें या बंदर की सूचना मिलती है, तो एक कॉल पर समिति के सेवक पहुंच जाते हैं। दर्द से तड़पते बेजुबानों का न सिर्फ इलाज कराते हैं, बल्कि ठीक होने तक उनकी देखभाल भी करते हैं। समिति को पिछले 6 साल में नगर व आसपास के क्षेत्र में 1 हजार से ज्यादा ऐसे गाय, बैल, बंदर मिले, जिनका इलाज करा उनकी जान बचा चुके हैं। संयोजक सुमित तिवारी ने बताया समिति में फिलहाल 20 से अधिक सदस्य हैं। प्यासे मवेशियों के लिए रखवाया गया कोटना इन दिनों गर्मी तेज पड़ रही है। इंसान ही नहीं जानवरों को भी प्यास लगती है। ऐसे में समिति ने इन प्यासे मवेशियों के पंडरिया व मैनपुरा, रौहा, तेंदुआडीह, अलीपुर में 72 जगहों पर कोटना रखवाया है।


