चालकों को परेशानी:पीबीएम की दीवार हादसे रोकने के लिए हटाई थी, अब होर्डिंग और हेज लगाकर कवर कर दी

शहर में होर्डिंग लगाकर कमाई करने के लिए नगर निगम ने अब सरकारी विभागों की जमीनों को भी ठेके पर देने का काम शुरू कर दिया है। नगर निगम ने हाल ही में शहर के सात में से चार जोन में होर्डिंग लगाने के लिए करीब तीन करोड़ रुपए के टेंडर एक साल के लिए किए हैं। विज्ञापन से कमाने के लिए ऐसी साइट भी ठेकेदार को सौंप दी जो, सरकारी विभाग की है। कहीं पर बिजली की हाई टेंशन तार निकल रहे हैं। रानी बाजार पुल के सामने पीबीएम हॉस्पिटल की जमीन भी यूनीपोल लगाने के लिए 64 लाख रुपए में दे दी गई है। पीबीएम प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है। दरअसल रानी बाजार पुल से उतरते समय रात में कई बार वाहन पीबीएम की दीवार से टकरा गए। दीवार के पास लगे होर्डिंग के रिफ्लेक्शन के कारण चालकों को परेशानी होती थी। लगातार हो रहे हादसे और पुल पर ट्रैफिक जाम के हालात को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर भगवती प्रसाद के कहने पर मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल ने वहां दीवार 30-40 फीट पीछे कर ली थी। स्थान खाली होने के बाद वहां भारी वाहनों को निकालने के लिए सर्किल बनाया जाना था, लेकिन किसी कारण नहीं बन पाया। उस स्थान पर ट्रैफिक पुलिस का पॉइंट बना दिया गया। लेकिन पिछले कुछ दिनों से वहां होर्डिंग लगाने के लिए यूनीपोल लगाने का काम चल रहा है। सौंदर्यीकरण के लिए हरियाली भी की गई है। पीबीएम अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि दीवार जनहित को देखते हुए पीछे की गई थी। सरकारी रिकॉर्ड में जमीन पीबीएम की है। यातायात के दबाव को देखते हुए हटाई थी दीवार आंबेडकर सर्किल से मेडिकल कॉलेज तक यातायात के दबाव को देखते हुए पीबीएम हॉस्पिटल की दीवार को पीछे करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए पुल के सामने और तत्कालीन अधीक्षक डॉ. पीके बेरवाल के सरकारी आवास से लेकर 16 नंबर आउटडोर तक दीवार को तोड़कर पीछे किया गया था। बाद में पीबीएम प्रशासन ने नई दीवार बनवा ली। रानी बाजार अंडर पास बनने के बाद भी भीड़ आंबेडकर सर्किल के पास रानी बाजार रेलवे क्रॉसिंग पर अंडर पास बनने के बाद भी पुल पर ट्रैफिक का दबाव कम नहीं हुआ है। दोनों ही जगह पर दिन में जाम के हालात हो जाते हैं। मेडिकल कॉलेज, एसएसबी, ईएनटी हॉस्पिटल से लेकर गंदे नाले तक अतिक्रमणों की भरमार है। उसकी वजह से भी ट्रैफिक जाम के हालात पैदा होते हैं।

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