शिकायत करने पर टीचर भड़की, बोलीं-FIR करवा जेल भिजवा दूंगी:पेरेंट्स से कहा- चाहे रिकॉर्डिंग कलेक्टर, दिलावर को भेज दें; विभाग ने APO किया

बाड़मेर में सरकारी स्कूल में पढ़ाई नहीं होने पर अभिभावक ने टीचर की शिकायत हेड मास्टर से कर दी। यह टीचर को नागवार गुजरा। उसने अभिभावक को फोन किया। टीचर ने नाराजगी जताते हुए अभिभावक से कहा- एफआईआर दर्ज करवाकर 7 साल की सजा दिला दूंगी। मुझे जानते नहीं हो, मेरी शिकायत क्यूं की? अब तेरी और मेरी व्यक्तिगत दुश्मनी है। चाहे रिकॉर्डिंग कर लें, चाहे इसे डीईओ, कलेक्टर और दिलावर को भेज दें। हालांकि दोनों की बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर आ गया। जिसे शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया और टीचर को कांकरला से मुख्यालय ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कल्याणपुर एपीओ कर दिया। मामला बाड़मेर के कल्याणपुर पंचायत समिति की उच्च प्राथमिक स्कूल विरधाणियों की ढाणी, कांकरला का है। पहले पढ़िए… टीचर और अभिभावक के बीच हुई बातचीत ग्रेड थर्ड टीचर सुशीला गुलेरीया अभिभावक (अशोक) को फोन करती है। जिसमें कहती है कि आप मेरे खिलाफ इतने आक्रोश में नहीं लिख सकते हो। आपके बच्चे पढ़ाई में कमजोर है तो कमजोर ही रहेंगे। मैंने प्रवीण के बारे में कहा था कि वो मेरे पास आता ही नहीं है। मेरे से डरता, किसी बच्चे से बोलता तक नहीं है। आप कह रहे हो कि बच्चों के साथ गलत हो रहा है। अभिभावक- पढ़ाई नहीं, सब टीचर समय पर स्कूल नहीं आती है। टीचर- जितने भी हस्ताक्षर करवाए थे ना उसका मैंने पता कर लिया है। अशोक जी आपसे गया गुजरा आदमी नहीं हो सकता है। अनोपाराम सहित सबसे पूछ लिया कि हमने साइन ही नहीं किए। अभिभावक- कल आना स्कूल, किसने साइन किए या नहीं, सबने लिखकर साइन किए है। आपको बता दूंगा। टीचर- आप स्कूल में आना, हम चौखटें पर नहीं आएंगे। मेरी स्कूल में एचएम (हैड मास्टर) का चार्ज मेरे पास ही रहेगा। मैं जवाब दूंगी। अशोकजी यह बातें अपने समाज के लिए अच्छी नहीं है। अभिभावक- मैंने एक ने नहीं, पूरे गांव ने साइन किए हैं। टीचर- मेरी बात सुनो, रीतू मैडम छुट्टियों में नहीं थी क्या? अभिभावक- मेरे को कुछ पता नहीं है, गांव वालों को बोलिये। टीचर- आपने शिकायत कैसे भेज दी गिरीश जी सर को। अभिभावक- गिरीश जी को मेरे ग्रुप में आई थी, तब मैंने भेजी है। बल्कि मैं नहीं भेजता हूं। मैडम- मेरी बात सुनो नीतू मैडम इतने छुटि्टयों में नहीं थी। मेरे से ज्यादा छुटि्टयों ली है। मेरे लिए फैमिली सबसे पहले है। मेरे पापा का ऑपरेशन हुआ था तब मैं एक माह की छुट्‌टी ली थी। एक महीने नहीं चार महीने रहूंगी। आप ढाणी वालों से पूछ कर नहीं रहूंगी। आप पूछने वाला कौन है। आपसे पूछकर नहीं जाऊंगी। अभिभावक- मैडम मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मेरे तो ग्रुप में आया और मैंने उनको भेज दी। मैं बच्चे को स्कूल ही छुड़वा दूंगा। मैडम- मेरी सुनो अगर मैंने एफआईआर दर्ज करवा दी ना, कई सुनने के लायक नहीं रहोंगे। मैं सरकारी कर्मचारी हूं इतना तो पावर मैं रखती हूं। अगर मैंने सुबह ही एफआईआर दर्ज करवा दी तो फिर आप बच जाओं तो मुझे बताना। अभिभावक – मैंने नहीं लिखा है गांव वालों ने लिखा है। मैडम- गिरीश जी को आपने भेजी थी। अभिभावक- सर को तो मैंने ही भेजी थी, ग्रुप में चल रही थी, यह पूछने के लिए मैंने भेजी थी। टीचर- आपने साइन करके आपने नहीं भेजी थी। अशोकजी एक बात का ध्यान रखना मैं सरकारी कर्मचारी हूं और अगर मैंने एफआईआर दर्ज करवा दी, सात साल की सजा, साथ में जुर्माना लगेगा। एक बार गौतम से पूछ लेना, उसका सुशीला से पंगा हुआ था। सुशीला डरने वाली लड़की नहीं है, नागौर की एक बैल है। आई बात समझ में, अकल ठिकाने ला दूंगी सभी गांव वालों की। अभिभावक- हमारे क्या लेना-देना है, आओ या नहीं आओ, नहीं पढ़ाओंगे तो हम बच्चों को स्कूल छुड़वा देंगे। मैडम- तो आपने गिरीश जी को क्यूं कहा, अशोक जी स्कूल में आकर मिल लेना नहीं तो एफआईआर करवा दूंगी। हमारे शाला दर्पण पर भी एफआईआर ऐसी होती है। आप 7 साल तक तो घर पर नहीं आ सकोंगे। मैंने गौतम को खून के आंसू रुला दिया था। एक बार उससे पूछ लेना। सभी फर्जी साइन करवा दिए। मैंने गांव वालों से पूछ लिया कि मैंने साइन नहीं किए। अभिभावक- मैं कल बता दूंगा कि साइन करवा दूंगा। सब पता चल जाएगा। टीचर- आपको साइन करने की क्या जरूरत पड़ गई। अशोक जी सुनो, अकल ठिकाने ला दूंगी। आज से आप मेरी व्यक्तिगत दुश्मनी मान लेना। मैं नौकरी करूंगी और कोई नोटिस नहीं आए। लेकिन आज के बाद तेरी और मेरी व्यक्तिगत दुश्मनी मान लेना। मैंने तेरे को जेल नहीं भेजा तो मेरा नाम सुशीला नहीं है। चाहे रिकॉर्डिग कर ले, चाहे डीईओ, कलेक्टर और दिलावर को भेज दें। क्यूं शिकायत की अगर टाइम पर नहीं आती हूं तो मेरे एचएम को सूचना दी होगी। आप ही नाम लेकर क्यूं भेजते हो, आप सरपंच हो क्या? मैंने आपको क्यूं भेजा, वहां पर। अभिभावक- मैं कुछ नहीं हूं, मेरे ग्रुप में आया, तब मैंने भेज दिया, बाकी मेरा कोई लेना-देना नहीं है टीचर- अरे 350 किलोमीटर दूर भेज दिया और आगे भी चले जाएंगे। मुझे इसका डर नहीं लगता है। एफआईआर दर्ज करवाऊंगी तो सारे के सारे अंदर हो जाएंगे। बच्चों से पूछ लेना मैडम पढ़ाती है या नहीं। मुझे आप पेमेंट नहीं देते हो सरकार मुझे देती है। कार्रवाई मैं करती हूं कि चुन-चुन कर ढाणी वालों को ले गई। मेरा नाम भी सुशीला नहीं है, इस बात का ध्यान रखना। 7 साल की सजा नहीं करवाई तो मेरा नाम जान लेना। यह है पूरा मामला
कल्याणपुर पंचायत समिति की उच्च प्राथमिक स्कूल विरधाणियों की ढाणी, कांकरला है। यहां 5 टीचर पोस्टेड है। पेरेंट्स ने शनिवार को एक सादे पेपर पर स्टाफ और टीचर सुशीला गुलेरिया की शिकायत लिखी। वह वॉट्सऐप पर शेयर हो गई। इस बीच एक पेरेंट ने शिकायत की कॉपी को स्कूल के हेड मास्टर गिरीश को फॉरवर्ड कर दिया। कॉपी महिला टीचर के पास पहुंची तो वह भड़क गई। टीचर ने सीधे फॉरवर्ड करने वाले पेरेंट को फोन किया और धमकाया। शिकायत में लिखा- मैडम 2 दिन ही आती है
पेरेंट और ग्रामीणों ने शिकायत में लिखा- सुशीला मैडम माह में दो दिन ही स्कूल आती हैं। बाकी स्कूल के स्टाफ भी समय पर नहीं आते है। वहीं एक मैडम 11 माह से छुट्‌टी पर है। समय पर टीचर नहीं आने से बच्चों की पढ़ाई खराब हो रही है। बच्चों को पढ़ाते भी नही है। घर से जैसे बच्चे स्कूल जाते है, वैसे ही बिना पढ़ाई के घर वापस आते है। पढ़ाई नहीं करवाई जा रही है। जानकारी सामने आने पर शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की। कल्याणपुर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बुद्धाराम चौधरी ने बताया- ऑडियो संज्ञान में आने के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर लेवल-1 महिला टीचर सुशील गुलेरिया को स्कूल से हटा कर उसका मुख्यालय जिला ब्लॉक शिक्षा ऑफिस किया गया। इससे जांच प्रभावित नहीं होगी। मामले में 3 सदस्यीय टीम बनाई गई है। 3 सदस्यीय टीम डीईओ को सौंपेगी रिपोर्ट
जांच टीम आज स्कूल पहुंची, जहां बच्चों और पेरेंट्स से जानकारी ली। टीम रिपोर्ट बनाकर जिला शिक्षा अधिकारी(डीईओ) को सौंपेगी। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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