नवरात्र में मंदिरों में सजावट, भोग और महाआरती के लिए 50-50 हजार रुपए का बजट दिया गया। ठेकेदार ने पुजारियों को एक किलो घी, एक किलो तेल और मिठाई का डिब्बा देकर पेपर पर साइन करा लिए। पुजारियों ने आरोप लगाए तो देवस्थान विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर ने जांच कराने की बात कही। मामला बांसवाड़ा-डूंगरपुर से जुड़ा है। देवस्थान विभाग की सहायक आयुक्त दीपिका मेघवाल ने बताया- हमने हर मंदिर के लिए 50 हजार का बजट तय किया था। बांसवाड़ा जिले के 63 मंदिर विभाग के अधीन है। इसमें मंदिर में सजावट, भोग, आरती, सहित अन्य कार्य किए जाने थे। बजट से नवरात्र पर मंदिरों में भोग, आरती, फूल, सजावट के लिए टेंडर किए गए थे। इसमें बांसवाड़ा शहर के 30, ग्रामीण में 33 मंदिर शामिल थे। वहीं डूंगरपुर शहर के 31 और ग्रामीण के 31 मंदिर शामिल थे। अब सिलसिलेवार पढ़िए-कैसे सामने आया घोटाला… पुजारी बोले- एक लीटर तेल और 500 रुपए दिए
बांसवाड़ा के भगोरा में स्थित भगोरेश्वर मंदिर के पुजारी विनोद शर्मा ने बताया- नवरात्र के नाम पर मुझे तेल की एक लीटर की बोतल, एक किलो घी का डिब्बा, आधा किलो मिठाई का डिब्बा और 500 रुपए देकर गए थे। इसके अलावा देवस्थान विभाग से कुछ नहीं मिला। हरसोरा (बांसवाड़ा) के ठाकुरजी मंदिर के पुजारी रामकृष्ण वैष्णव ने बताया- देव स्थान विभाग से हमें यहां किसी भी तरह की पूजन सामग्री नवरात्र में प्राप्त नहीं हुई। न देवस्थान विभाग की ओर से वेतन मिल रहा। हम बस ऐसे ही मंदिर में पूजा कर रहे हैं। नवरात्र पर विभाग की ओर से मंदिर में किसी तरह की सजावट नहीं कराई गई। टेंडर की शर्त थी कि सजावट कराएंगे
मंदिर के पुजारियों ने ने बताया- टेंडर की शर्तों के अनुसार नवरात्र के शुरू होने से पहले ही सभी मंदिरों में सजावट सामग्री और अन्य सभी सुविधाएं पहुंचनी थी। लेकिन जिस फर्म को टेंडर मिला उसने मंदिर के पुजारियों को घी-तेल, मिठाई देकर साइन करा लिए। 50 हजार रुपए के बजाए महज दो ढाई हजार रुपए में व्यवस्थाओं से पल्ला झाड़ लिया गया। किसी भी मंदिर में नहीं कराई सजावट
करीब 10 मंदिरों के पुजारियों से बातचीत और पड़ताल करने के बाद सामने आया कि मंदिरों में किसी प्रकार की कोई सजावट नहीं की गई। न ही भोग आरती को लेकर कोई सुविधा की गई। कुछ पुजारियों ने बताया कि नवरात्र के पहले विभाग के कुछ कर्मचारी और ठेकेदार आए थे। कंटेंट सहयोग- कुणाल त्रिवेदी


