प्रदेश में सांसद-विधायकों के खिलाफ दर्ज क्रिमिनल केसेज में सरकारी वकीलों को बिना वजह तारीख नहीं लेने की हिदायत दी गई है। यह जानकारी बुधवार को हाईकोर्ट में सरकार की ओर से दी गई। मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव की खंडपीठ बुधवार को इस मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान से दर्ज याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने इस बारे में जारी सरकारी आदेश पेश करने के लिए समय देते हुए सुनवाई 12 मई तक टाल दी। बताया जा रहा है कि प्रदेश में सांसदों-विधायकों के खिलाफ 51 मुकदमे लंबित हैं। सुनवाई टालने का नहीं करें आग्रह
सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि सांसदों व विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों में सुनवाई में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने सभी लोक अभियोजकों को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी लोक अभियोजकों को इन मामलों में संबंधित न्यायालयों को पूर्ण सहयोग करने और बेवजह सुनवाई टालने का आग्रह नहीं करने की हिदायत दी गई है। उधर, हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल की ओर से भी सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश कर दिए जाने की जानकारी कोर्ट को दी गई, लेकिन रिपोर्ट अभी तक सरकार को नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को दिए थे निर्देश
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में एमपी-एमएलए से जुड़े क्रिमिनल केसों के मामले में दिशा-निर्देश जारी कर हाईकोर्ट को इन केसों की निगरानी के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को कहा था कि वे इन केसों के संबंध में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेकर इसे दर्ज करें और इन केसों में ट्रायल कर रहे जिला जज या स्पेशल कोर्ट की मॉनिटरिंग करें। वेबसाइट पर भी जानकारी शेयर करने के निर्देश
हाईकोर्ट इन केसों में सुनवाई कर रही कोर्ट से समय-समय पर इन केसों की ट्रायल की रिपोर्ट मांगें और जरूरत हो तो इन केसों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाएं। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को भी कहा था कि वे जब तक अति आवश्यक नहीं हो तब तक इन केसों की ट्रायल नहीं टालेंगे। वहीं एक वेबसाइट भी बनाई जाए जिस पर यह ब्योरा हो कि किस जिले में एमपी-एमएलए के खिलाफ कितने क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं और उनकी स्थिति क्या है।


