भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा कुआकोंडा और कटेकल्याण के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के भवन का काम 2 साल में भी पूरा नहीं हो पाया है। इन भवनों को डबल स्टोरी बनाया जाना है, ग्राउंड फ्लोर का काम तो जैसे-तैसे स्ट्रेक्चर खड़ा हो गया है, उसमें भी खिड़की दरवाजे नहीं लग पाए हैं। यह वही दो विवादित अस्पताल हैं जिनके निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों को एजेंसी बनाया गया था और ग्राम पंचायत को 40 प्रतिशत एडवांस राशि भी काम शुरू होने से पहले दे दी गई थी, अब अस्पतालों का काम रुक गया है। कुआकोंडा और कटेकल्याण दोनों सीएससी भवन जर्जर हालत में हैं, दोनों जगह अभी हाल में ही मरम्मत के नाम पर फिर से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, फिर भी बारिश में दोनों अस्पतालों में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। दोनों ब्लाक मुख्यालय के अस्पताल में 25 से 30 गांवों के लोग इलाज करवाने आते हैं, कुआकोंडा में तो एक ही वार्ड है, जहां 10 बेड हैं, जबकि यह अस्पताल 20 बिस्तर है, पर जगह की कमी होने की वजह से सिर्फ रेफर सेंटर की तरह यह अस्पताल काम कर रहा है। कटेकल्याण अस्पताल में भी अभी हाल ही में मरम्मत किया गया है, पर हालात जस की तस हैं। कुआकोंडा और कटेकल्याण अस्पताल में 40 प्रतिशत अग्रिम राशि ग्राम पंचायत को अस्पताल बनाने दी गई थी, कुआकोंडा में तो वही सरपंच फिर से निर्वाचित हुई हैं जिन्होंने एडवांस राशि निकाली थी, पर कटेकल्याण में सरपंच बदल गए हैं, अब भवन का निर्माण कैसे पूरा होगा यह बड़ा सवाल है। निर्माण कार्य रुका हुआ है और निर्माण एजेंसियों को अब तक एक भी नोटिस तक आरईएस जारी नहीं कर पाया है। इन दोनों अस्पतालों के लिए निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायतों को जब बनाया गया था तब सारे नियम विभाग ने ताक पर रख दिए थे। ग्राम पंचायत को 50 लाख तक के काम करने का अधिकार होता है, पर दंतेवाड़ा में चार-चार करोड़ के काम दे दिए गए थे जो अब परेशानी का कारण बन गए हैं।


