आर्ट ऑफ लिविंग करेगी गांवों में जल प्रबंधन में मदद:वाटरशेड डेवलपमेंट, चंदेला-बुंदेला तालाबों के पुनरुद्धार, जल संरक्षण पर करेंगे काम

प्रदेश में नदियों के उद्गम क्षेत्रों में वाटरशेड विकास तथा पारंपरिक चंदेला-बुंदेला तालाबों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए आर्ट ऑफ लिविंग संस्था सहयोग करेगी। आर्ट ऑफ लिविंग की सहयोगी संस्था व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया और मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के बीच इसे लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर गुरुवार को हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के जरिए राज्य के विभिन्न जलग्रहण क्षेत्रों में कार्य योजना बनाना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण देना, समुदाय आधारित जागरूकता अभियान चलाना और जल प्रबंधन को सशक्त करने का काम किया जाएगा। यह एमओयू जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत लागू किया जाएगा। आर्ट ऑफ लिविंग’ की ओर से व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया के अध्यक्ष रोहित सिक्का एवं मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद की ओर से आयुक्त अवि प्रसाद ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया द्वारा पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक जनहित में ग्रामीण समुदायों को जल संरक्षण, जल प्रदूषण नियंत्रण एवं जल गुणवत्ता सुधार पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसरो सहित अन्य एजेंसियों से प्राप्त रिमोट सेंसिंग डेटा के आधार पर वैज्ञानिक कार्य योजना तैयार की जाएगी। जल संचयन की संभावनाओं को सिपरी ( SIPRI) सॉफ्टवेयर के माध्यम से चिह्नित किया जाएगा और इसमें सुधार के लिए तकनीकी सहायता भी दी जाएगी। मनरेगा के अमले को परियोजना रिपोर्ट (ई-डीपीआर) बनाने में सहयोग प्रदान किया जाएगा। बताया गया कि इसके अलावा संस्था द्वारा फील्ड डेटा संग्रहण हेतु मोबाइल ऐप्स की सुविधा दी जाएगी एवं कार्यों की निगरानी की जाएगी। युवा नेतृत्व प्रशिक्षण, जल चेतना शिविर जैसे कार्यक्रमों से जोड़कर कम्युनिटी बेस्ड जल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को पानी संबंधी मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा। जल नीति और अधिनियमों के प्रति सभी हितधारकों के बीच जागरूकता पैदा की जाएगी। इस समझौते के तहत तैयार की गई कार्य योजनाओं का क्रियान्वयन मनरेगा के नियमानुसार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जो कार्य मनरेगा में नहीं किए जा सकते हैं उन्हें अन्य स्रोतों से वित्तीय संसाधन जुटाकर पूरा किया जाएगा। यह सहयोग प्रदेश में जल संरक्षण को एक व्यापक सामाजिक आंदोलन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक पहल है। इसके आधार पर राज्य में जल संरक्षण और संवर्धन को वैज्ञानिक ढंग से सशक्त बनाया जाएगा।

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