भींडर में अजीबोगरीब मामला सामने आया है। 45 साल की एक महिला नवजात शिशु का 1 माह से पालन पोषण कर रही थी। आसपास के लोगों ने महिला को कभी गर्भवती नहीं देखा तो उन्हें शक हुआ कि यह बच्चा कहां से आ गया? उन्होंने बाल कल्याण समिति (बाल कल्याण समिति) को सूचना दी। समिति जांच के लिए पहुंची। महिला इस बच्चे को अपना बताती रही। इसके बाद थाने में पूछताछ हुई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ममता कार्ड के साथ ही आस पड़ोस के लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन किसी ने भी महिला को गर्भवती देखना नहीं बताया। बाद में मामला उस समय उलझ गया, जब एक प्राइवेट अस्पताल के कर्मचारी ने यह लिखकर दे दिया कि महिला गर्भवती थी। बच्चा भी उसी का है। इसके बाद समिति सदस्य लौट आए, लेकिन देर रात महिला ने फाेन किया और बताया कि यह बच्चा उसका नहीं है। यह उसे कचरे में पड़ा मिला था। अब समिति ने मामले की जांच के लिए पुलिस को पत्र लिखा है। आशंका जताई है कि बच्चा चुराया तो नहीं गया। डीएनए जांच की मांग की गई है। खास बात यह है कि महिला के 3 लड़की और एक लड़का पहले से है। नवजात को अब समिति उदयपुर में शिशु गृह ले आई है। जांच पूरी होने तक समिति की देखरेख में बच्चा रहेगा। अस्पताल के कर्मचारी ने गर्भवती बताया, उस पर भी संदेह समिति के अनुसार भींडर निवासी महिला ललिता चंदेल (45) और पति भैरूलाल चंदेल (65) पिछले एक माह से एक माह की अवधि का बच्चा लेकर घूम रहे थे। इस बच्चे को अन्य लोगों के समक्ष अपना ही बता रहे थे। बच्चा इनका नहीं होने की सूचना के बाद समिति अध्यक्ष यशोदा पणिया के नेतृत्व में सदस्य भींडर पहुंचे और जांच की। समिति की जांच के दौरान महिला ने थाने में बच्चा अपना बताया। डिलीवरी घर पर ही होना बताया। इलाज प्राइवेट अस्पताल में चलना बताया। समिति ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से पूछा तो उसने भी कहा कि ललिता को गर्भवती नहीं देखा। उसका ममता कार्ड भी नहीं बना था। यह महिला जिन घरों में काम करती थी, वहां और आसपास के घरों में जानकारी ली तो हाल के महीनों में उसे किसी ने गर्भवती नहीं बताया। अब आरोपी महिला के सचाई कबूलने के बाद निजी अस्पताल के उस कर्मचारी पर भी संदेह गहरा गया है जिसने इस बात की तस्दीक की थी कि महिला गर्भवती थी। बता दें कि महिला का पित भैरूलाल मेडिकल विभाग में बाबू के पद से रिटायर है। ऐसे में मिलीभगत की आशंका भी है। बड़ा सवाल…पालन दया भाव से या तस्करी-बालश्रम कराना था उद्देश्य?
महिला के इस तरह पालन-पोषण किए जाने के पीछे तीन तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं। पहला- मानव तस्करी के लिए भी बच्चे को कहीं से लाना माना जा रहा है तो बालश्रम की मंशा से भी भरण-पोषण करने की आशंका है। इसके अलावा दयाभाव की भी संभावना है। यह इसलिए कि महिला के 4 संतानें पहले से हैं। ऐसे में उसे कहीं से यह बच्चा मिला और वह पालने लगी। हालांकि, असलियत क्या है इसकी गुत्थी पुलिस ही सुलझाएगी। समिति अध्यक्ष यशोदा पणिया ने बताया कि जांच व कार्रवाई दोनों ही भींडर एसएचओ करेंगे। आरएनटी को पत्र लिखकर बच्चे का डीएनए कराने को कहा है।


