रतलाम पहलवान बाबा दरगाह मामला:​​​​​​​6 हिंदू-6 मुस्लिम पक्ष ने लगाया वाद; कोर्ट ने किया खारिज, सुनवाई योग्य नहीं माना

रतलाम के पहलवान शाह बाबा दरगाह जावरा रोड के मामले में 6 हिंदू और 6 मुस्लिम पक्ष द्वारा कोर्ट में पूजा, तवाफ और उर्स करने का दावा किया था। इसको लेकर कोर्ट में वाद लगाया गया। लेकिन, न्यायालय ने इसे सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए वाद को निरस्त कर दिया। अपर लोक अभियोजक सतीश त्रिपाठी ने बताया कि 9 दिसंबर 2024 को समरोज पिता फिरोज खान, संजय जैन पिता मनोहरलाल जैन, हेमंत सिंह चंद्रावत पिता गोवर्धन सिंह चंद्रावत एडवोकेट, आनंद दांगी पिता देवीलाल डांगी, भंवरलाल कैथवास पिता रामदुलारे, प्रीति जैन पति संजय जैन, अनीता पिता वरसिंह, सलाम कुरेशी पिता रमजानी कुरेशी, अब्बास शाह पिता गफ्फार शाह, एहसान अहमद पिता याकूब खान, जफर हुसैन पिता हामिद शाह एवं अब्दुल हनीफ खान पिता अब्दुल गनी ने दरगाह कमेटी के पदाधिकारी और श्रद्धालु की हैसियत से आवेदन प्रस्तुत किया थाl सभी ने दरगाह पहलवान शाह बाबा की 150 फीट चौड़ी एवं 40 फीट लंबी जगह पर धार्मिक गतिविधियां संचालित करने के लिए की अनुमति मांगी थी। मामले की सुनवाई तृतीय व्यवहार न्यायाधीश अनुपम तिवारी की न्यायालय में हुई l पूजा करने से किसने रोका स्पष्ट नहीं तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड अनुपम तिवारी ने अपने निर्णय में कहा कि दावे में यह स्पष्ट नहीं है कि जमीन वक्फ की है या नहीं। उन्हें वहां प्रार्थना, पूजा करने से किसने रोका। दावे में कहा गया कि सार्वजनिक हित के लिए फोर लेन सड़क नहीं बनाई गई। वरन जबरन ही यह काम किया है। शासन ने वादी द्वारा प्रस्तुत आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है। इसको लेकर एक आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया था l शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी ने बताया कि आवेदन में यह था कि शासन के खिलाफ दरगाह पहलवान शाह बाबा जावरा रोड में पूजा के अधिकार से संबंधित एक वाद दायर किया था। शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि डोसीगांव-रतलाम से गुजरने वाली फोर लेन सड़क का निर्माण हो रहा है। वादी क्रमांक 1 के रिश्तेदार ने पहले ही एक अन्य वाद सिविल न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी के समक्ष दायर किया हुआ है। दरगाह को किया सुरक्षित न्यायालय ने अपने फैसले में लिखा कि राज्य सरकार ने दरगाह द्वारा किए गए अतिक्रमण के खिलाफ नोटिस जारी किया है। प्रक्रिया शुरू की गई और अतिक्रमण हटा दिया गया। राज्य ने दरगाह की कब्र गाह को स्टील कैबिनेट लगाकर संरक्षित किया है। वादी पक्ष ने खुद को समाज का सदस्य बताते हुए वाद दायर किया है, लेकिन किसी भी समाज का नाम वाद में पक्षकार के रूप में नहीं जोड़ा है। यह उल्लेख नहीं है कि दरगाह वक्फ से संबंधित है या नहीं। अपीलकर्ताओं ने यह तर्क प्रस्तुत किया कि राज्य सरकार मनमाने तरीके से सड़क का निर्माण और चौड़ीकरण कर रही है। निर्माण की पूरी योजना का कोई नक्शा प्रस्तुत नहीं किया है। फोर लेन सड़क किसी अव संरचनात्मक परियोजना से जुड़ी हुई नहीं है। वादी पक्षकार नहीं हैं, इसलिए वे ऐसी कार्रवाई से अवगत नहीं हैं। राज्य शासन की तरफ से शासकीय अधिवक्ता त्रिपाठी ने तर्क किया कि वाद प्रस्तुत करने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि वाद में यह भी नहीं बताया कि किस दिन और कब शासन ने किसी को दरगाह पहलवान शाह में पूजा करने से रोका या विरोध किया। यह इस कारण से भी गलत है, क्योंकि इसके बारे में आवश्यक दस्तावेज नहीं लगाए गए। कोर्ट ने कहा- वादी के पक्ष में बात प्रस्तुत करने का कोई कारण नहीं होने से इसे खारिज किया जाता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *