सत्ताधारी नेता पंडित-ज्योतिषियों के यहां क्यों लगा रहे चक्कर?:बड़े लीडर ने नाम पुकारा, गायब थे नेता प्रतिपक्ष; अफसरों के सामान से भरे ट्रक चर्चा में

आम जीवन हो या सियासत, हर व्यक्ति एक जैसा नहीं होता। हर किसी को एक ही डंडे से हांकने वाली कहावत भी इसीलिए बनी है, लेकिन कुछ कर्मचारियों ने इसका ध्यान नहीं रखा। पिछले दिनों कुछ कर्मचारी सजातीय मंत्री से मिलने गए। बात चली तो कर्मचारियों ने मौजूदा दौर में शॉर्ट कट बन चुका जातीय कार्ड खेलना चाहा। बेवजह की तारीफ करने लगे। मंत्री को यह अच्छा नहीं लगा और कर्मचारियों से कुछ बुनियादी सवाल पूछ लिए, जिनका उनके पास जवाब नहीं था। सजातीय कार्ड के सहारे नंबर बढ़ाने का दांव उलटा पड़ गया। फील्ड में लगे कर्मचारियों से मंत्री ने ड्यूटी टाइम में इधर-उधर ऐसे-ऐसे सवाल पूछे कि काटो तो खून नहीं। जवाब देते नहीं बना। ड्यूटी टाइम में फील्ड छोड़कर आने वाले कर्मचारियों को समझ में आ गया कि हर नेता एक जैसा नहीं होता। पूर्वी जिले के दो अफसरों की राजधानी तक क्यों हुई चर्चा? पूर्वी राजस्थान के एक बड़े जिले में तैनात दो बड़े अफसरों की चर्चाएं राजधानी के गलियारों तक पहुंच गई हैं। प्रशासन के बड़े अफसर और एक विकास वाली एजेंसी में लगे अफसर के सप्लाई चेन मैनेजमेंट को लेकर बातें टॉप तक पहुंच गई हैं। दोनों अफसरों ने जिले से बड़ी मात्रा में अलग-अलग सामान राजधानी के बंगलों के लिए भिजवाया। अब ट्रक भरकर सामान पहुंचेगा तो बातें छिपी थोड़े ही रहेंगी। किसी ने हार्डवेयर का सामान भिजवाया तो किसी ने महंगे उपकरण। जानकार इस बात से अचंभित हैं कि जो सामान के ब्रांड प्रदेश और देश की राजधानी में ही मिलते हैं, वे अगर जिले से आए तो बातें छिपती थोड़े ही है। अब विरोधी भी सक्रिय हो गए हैं। किसी ने दोनों अफसरों के जिले से राजधानी भिजवाए गए आइटम्स को लेकर टॉप तक भी बातें पहुंचा दी हैं। हालांकि यह नई बात नहीं है, ऐसा पहले भी हो चुका है। इस तर्क के साथ टॉप लेवल को भी कनवींस करने की कोशिश है। अफसरों ने साइबर फ्रॉड का खतरा बताकर हटवाए नंबर राजधानी से लेकर जिलों तक जिम्मेदार पदों पर बैठे अफसरों के नंबर लंबे समय से कार्मिक विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध थे। अफसरों के नंबर पब्लिक डोमैन में रहेंगे तो जनता को अप्रोच करने में आसानी रहती है। हाल ही सभी अफसरों के मोबाइल नंबर हटा लिए गए, अब अफसरों के दफ्तर के लैंडलाइन नंबर हैं। सुना है, अफसरों ने साइबर फ्रॉड का खतरा बताकर मोबाइल नंबर कार्मिक विभाग की वेबसाइट से हटवा दिए हैं। गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। राहुल के भाषण के वक्त अधिवेशन छोड़कर कहां गए थे जूली? पड़ोसी राज्य में हुए विपक्षी पार्टी के अधिवेशन में राजस्थान चर्चा में रहा। सत्ताधारी पार्टी के चर्चित नेता ने मंदिर में गंगाजल छिड़ककर नेता प्रतिपक्ष को नेशनल लेवल पर सुर्खियों में ला दिया। अधिवेशन में भी यह मुद्दा और नेता प्रतिपक्ष की चर्चा रही। राष्ट्रीय अध्यक्ष और सबसे पावरफुल नेता तक ने अपने भाषण में जिक्र किया। विपक्षी पार्टी के सबसे पावरफुल नेता ने अपने भाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष का नाम लेकर उन्हें बुलाया, लेकिन उस वक्त वे वहां मौजूद ही नहीं थे। नेता प्रतिपक्ष संगठन मुखिया के साथ पहले ही प्रदेश की राजधानी की फ्लाइट पकड़ चुके थे, क्योंकि पार्टी के सबसे पावरफुल नेता की कुछ देर बाद अगवानी करनी थी। पद के लिए ज्योतिषियों, आश्रमों और सियासी आकाओं की शरण में सत्ताधारी नेता सत्ताधारी पार्टी में आगे बड़े पदों पर बड़ी संख्या में नियुक्तियां होनी हैं। कब होंगी यह टाइम तय हीं है, लेकिन जो दावेदार हैं उन्हें तो अभी से अपने समीकरण सेट करने शुरू कर दिए हैं। देश की राजधानी में अपने सियासी आकाओं के यहां कई विधायक हाजिरी लगा चुके हैं। पिछले दिनों पदों के इच्छुक कुछ नेता उत्तराखंड के एक प्रसिद्ध आश्रम में भी हाजिरी लगाकर आए। कुछ सत्ताधारी नेता अपनी जन्मपत्री दिखाने प्रसिद्ध ज्योतिषी के पास भी गए। पद पाने के दावेदार सत्ताधारी नेता इन दिनों सारे समीकरणों को साधने में जुटे हैं। सियासी आकाओं के साथ अध्यात्म और ज्योतिष का सहारा ले रहे हैं। दूसरे दलों से आए नेताओं ने भी पूरा जोर लगा रखा है, अब पद कब मिलेगा यह तो कोई नहीं बता सकता लेकिन तैयारी में कोई कमी नहीं है। किसने की पद मिलने की एडवांस में घोषणा? सत्ता केंद्रों के आसपास पदों को लेकर हमेशा खींचतान और एक्सरसाइज चलती ही रहती है। प्रदेश में सियासी रसूख वाले अफसरों को रिटायर होते ही राजनीतिक नियुक्तियां देने का पुराना इतिहास रहा है। मौजूदा सरकार में भी कई सत्ता केंद्रों के चहेते अफसर अभी से रिटायरमेंट प्लानिंग में जुट गए हैं। कुछ अफसरों ने तो रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले पदों के बारे में भी घोषणा कर दी। अब सत्ता केंद्रों में तो दीवारों के कान बहुत तेज होते हैं तो बात आउट हो गई। अब यह बात कौन समझाए कि सरकार में पद मिला हुआ तभी समझिए जब आपके आदेश हो जाएं। पुराना इतिहास रहा है कि जिन्होंने पहले घोषणाएं कर दीं, उनका पद ऐनवक्त पर दूर खिसकता हुआ देखा है। सुनी-सुनाई में पिछले सप्ताह भी थे कई किस्से, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें नेताजी का तबादलों में लेनदेन का ऑडियो:बड़े नेता पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप; मंत्रीजी को सता रही फिटनेस की चिंता

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