आतंकी तहव्वुर राणा से पहले दिन 3 घंटे पूछताछ:NIA ने कहा- कोऑपरेट नहीं कर रहा; परिवार-दोस्तों की जानकारी जुटाने की कवायद

2008 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पहले दिन (शुक्रवार को) 3 घंटे पूछताछ की। एजेंसी ने बताया कि वह कोऑपरेट नहीं कर रहा है। NIA की कोशिश है कि तहव्वुर के परिवार और दोस्तों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। NIA की DIG जया रॉय की अगुआई में जांच हो रही है। सूत्रों ने बताया कि तहव्वुर 24 घंटे सख्त पहरे में रहेगा। उसके खाने समेत हर चीज पर कड़ी नजर रखी जा रही है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने राणा को 18 दिन की NIA कस्टडी में भेजा है। कस्टडी के दौरान NIA रोजाना राणा से पूछताछ की एक डायरी तैयार करेगी। आखिरी दौर की पूछताछ के बाद डिस्कलोजर स्टेटमेंट में उसे रिकॉर्ड पर लिया जाएगा। यह केस डायरी का हिस्सा होता है। 64 साल के राणा को 10 अप्रैल को स्पेशल विमान से अमेरिका से लाया गया था। देर रात पटियाला हाउस कोर्ट के स्पेशल NIA जज चंद्रजीत सिंह ने बंद कमरे में मामले की सुनवाई की और रात 2 बजे फैसला सुनाते हुए NIA को उसकी कस्टडी दी। कल रात ही राणा की पहली तस्वीर भी सामने आई, जिसमें नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के अधिकारी उसे पकड़े हुए नजर आए। आज यूएस डिपार्मेंट ऑफ जस्टिस ने एक और तस्वीर जारी की है। इसमें अमेरिकी मार्शल उसे NIA के अफसरों को सौंप रहे हैं। तहव्वुर के प्रत्यर्पण की तीन तस्वीरें, जंजीरों में बंधा दिखा… तहव्वुर को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा जाएगा राणा को दिल्ली की तिहाड़ जेल में हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जाएगा। हालांकि, उसे कब और किस वार्ड में रखा जाएगा, इसका जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। जांच एजेंसी NIA और खुफिया एजेंसी RAW की एक जॉइंट टीम बुधवार को राणा को लेकर अमेरिका से रवाना हुई थी। गुरुवार शाम करीब 6:30 बजे राणा को लेकर अमेरिकी गल्फस्ट्रीम G550 विमान दिल्ली के पालम टेक्निकल एयरपोर्ट पर लैंड हुआ था। जहां उसका मेडिकल चेकअप हुआ, इसके बाद उसे सीधे NIA हेडक्वार्टर ले जाया गया। NIA की तरफ से कोर्ट में पेश दलील NIA की तरफ से वकील दयान कृष्णन ने पक्ष रखा, जबकि राणा की तरफ से वकील पीयूष सचदेवा ने मामले की पैरवी की। राणा को कोर्ट में पेश करने तक की पूरी टाइमलाइन अमेरिका बोला- आतंक से निपटने के लिए भारत के साथ काम जारी रखेंगे तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को लेकर अमेरिका ने कहा कि वह भारत के साथ मिलकर आतंकवाद की वैश्विक समस्या से निपटने के लिए काम करना जारी रखेगा। अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा कि अमेरिका ने हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने के भारत की कोशिशों का लगातार समर्थन किया है। ब्रूस ने कहा कि अब राणा भारत के कब्जे में है और 26/11 हमलों में शामिल होने के लिए उसे मुकदमा का सामना करना पड़ेगा। हमें इस प्रत्यर्पण पर गर्व है। मुंबई हमले में 166 आम लोग और 9 आतंकी मारे गए थे 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने हमले किए। ये हमले चार दिनों तक चले। इन हमलों में कुल 175 लोग मारे गए, जिनमें 9 हमलावर भी शामिल थे और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। तहव्वुर राणा को अमेरिका के शिकागो में अक्टूबर 2009 में FBI ने गिरफ्तार किया था। उस पर मुंबई के 26/11 और कोपेनहेगन में आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए जरूरी सामान मुहैया कराने का आरोप था। मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हेडली की गवाही के आधार पर तहव्वुर राणा को 2013 में आतंकी संगठन लश्कर से रिश्ते रखने और डेनिश अखबार पर हमले की साजिश के आरोप में 14 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। राणा पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर रहा, कनाडाई नागरिक पाकिस्तान ने राणा से पल्ला झाड़ा
पाकिस्तान ने गुरुवार को तहव्वुर राणा से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वह कनाडा का नागरिक है। पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने एक सवाल के जवाब में कहा कि तहव्वुर राणा ने पिछले दो दशकों से अपने पाकिस्तानी दस्तावेजों को रिन्यू नहीं कराया है। उसके पास कनाडा की नागरिकता है। गौरतलब है कि पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को दोहरी नागरिकता रखने की अनुमति देता है जो कनाडा में जाकर बस गए हैं। अमेरिका बोला- पीड़ितों को न्याय देने की दिशा में जरूरी कदम
अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने कहा कि मुंबई आतंकी हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण पीड़ितों को न्याय देने की दिशा में जरूरी कदम है। डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा- राणा का प्रत्यर्पण मुंबई हमलों में मारे गए 6 अमेरिकियों और कई अन्य पीड़ितों को न्याय देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अक्टूबर 2009 में गिरफ्तार हुआ था राणा
अमेरिका के शिकागो में अक्टूबर 2009 में FBI ने ओ’हेयर एयरपोर्ट से तहव्वुर राणा को गिरफ्तार किया था। उस पर मुंबई और कोपेनहेगन में आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए जरूरी सामान मुहैया कराने का आरोप था। हेडली की गवाही के आधार पर राणा को 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। 2011 में राणा को दानिश न्यूजपेपर मॉर्गेनाविसेन जाइलैंड्स-पोस्टेन पर हमले की साजिश रचने का दोषी पाया गया था। इस अखबार ने 2005 में पैगंबर मोहम्मद पर 12 विवादित कार्टून्स छापे थे। हमले में एक कार्टूनिस्ट का सिर कलम कर दिया गया। अगले ही साल यही 12 कार्टून ‘चार्ली हेब्दो’ नाम की फ्रांसीसी मैगजीन ने छापे, जिसके बदले में 2015 में चार्ली हेब्दो के ऑफिस पर हमला करके 12 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

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