जेडीए की कार्रवाई:डिमार्केशन में जीरो सैटबेक बताया, कार्रवाई के दिन पूरा अस्पताल तोड़ा

खातीपुरा रोड पर सड़क को 160 फीट मानते हुई जेडीए की कार्रवाई पर प्रभावितों ने सवाल उठाए है। यहां पूर्व डीजी नवदीप सिंह और उनके पत्नी पूर्व विधायक परमनवदीप सिंह के अस्पताल को भी अतिक्रमण मानकर ध्वस्त कर दिया। इस मामले में डॉ. परमनवदीप सिंह का आरोप है कि भूखंड संख्या ए-16 और 17बी में 30 साल से अस्पताल चल रहा है। जेडीए ने नवंबर में डिमार्केशन के दौरान सड़क 100 फीट मानकर अतिक्रमण चिह्नित किए थे, तब अस्पताल का केवल कुछ हिस्सा अतिक्रमण बताया था। इसे लेकर नोटिस दिया था तो हमने जवाब दिया, लेकिन इस जेडीए को दुबारा कोई जवाब नहीं आया। 5 अप्रैल को सड़क का सेंटर पाइंट बदल दिया और अस्पताल के अंदर तक के हिस्से को अतिक्रमण बताकर 9 अप्रैल को पूरा अस्पताल ध्वस्त कर ​दिया। कार्रवाई ​पर 71 प्रभावितों ने आपत्ति दर्ज करवाई इस कार्रवाई के खिलाफ अब जेडीए में 71 प्रभावितों ने आपत्ति दर्ज करवाकर दस्तावेज पेश किए है। प्रभावित 15 अप्रैल को उपायुक्त जोन 7 कार्यालय 3 से 5 बजे तक दस्तावेज पेश कर सकते है। जेडीए पट्टे को भी आधार नहीं माना पूर्व डीजी नवदीप सिंह ने बताया कि भूखंड संख्या ए-15 का साइज 500 वर्ग गज है, जेडीए से 429.16 वर्गगज का पट्टा जारी किया हुआ है। कार्रवाई से पहले इसका मुझे कोई नोटिस नहीं दिया गया। जेडीए पट्टे के अनुसार भी कार्रवाई होती केवल 12.50 फीट तक जगह ध्वस्त करनी थी, लेकिन जेडीए ने 55 फीट अंदर तक अतिक्रमण मानकर बिल्डिंग गिरा दी। रातोंरात सड़क 100 फीट से 160 फीट कर दी गई। जेडीए ने हाईकोर्ट के 21 नवंबर के आदेश के आधार पर पूरी सड़क से अतिक्रमण हटाया, लेकिन 29 नवंबर को इस आदेश को निरस्त किया था। जेडीए ने तथ्य छिपाकर पुराने आदेश के आधार पर मनमर्जी से कार्रवाई की गई, जबकि झाडखंड मोड़ से खातीपुरा तिराहे तक नगर निगम ने हाल में जो जिन भूखंडों को पट्टे जारी किए, इनमें भी इस सड़क की चौड़ाई 100 फीट ही माना है। परमनवदीप सिंह ने कहा- हम कागज दिखाने के लिए खड़े थे, तो पुलिस ने धक्का-मुक्की की पूर्व विधायक परमनवदीप सिंह का कहना है कि जिस दिन कार्रवाई हुई उस दिन सुबह 6:15 बजे मैं और नवदीप दस्तावेज लेकर खड़े थे। इससे पहले पुुलिसकर्मियों ने फोन छीन लिया और धक्के मारे। 10 घंटे तक हिरासत में रखा गया। जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ और कई लोगों को अतिक्रमी बता दिया गया, जो गलत है। पूर्व विधायक ने कहा कि कार्रवाई के दौरान एक पुलिस अधिकारी ने मोबाइल छीन लिया। विरोध करने पर धक्का मारकर गाड़ी में बैठा दिया और 10 घंटे तक थाने में बंद रखा। इस संबंध में पुलिस कमिश्नर को शिकायत की है।

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