कोंडागांव में पर्यटन विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे 3 करोड़ 57 लाख रुपए की लागत से बना विश्रामगृह आज खंडहर में तब्दील हो गया है। तत्कालीन पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस भवन का लोकार्पण किया था। बस्तर आने वाले पर्यटकों के लिए इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया था। लेकिन पिछले 10 सालों में किसी अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि जब भवन की देखरेख की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब न कोई सुरक्षा थी और न ही कोई रखवाला। अब जब सब कुछ बर्बाद हो चुका है, तब विभाग ने इस पर ताले लगा दिए हैं। स्थिति यह है कि शाम होते ही यह विश्रामगृह शराबियों का अड्डा बन जाता है। नशेड़ी यहां शीशे तोड़ते हैं, सोफे फाड़ते हैं और दीवारों को नुकसान पहुंचाते हैं। स्थानीय लोग अब इसे ‘भूत बंगला’ कहने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार भवन के निर्माण के बाद मरम्मत के नाम पर भी करोड़ों रुपए खर्च किए गए। हर बार मरम्मत का पैसा अधिकारियों और ठेकेदारों की जेब में गया, लेकिन भवन की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। विश्रामगृह की पूरी व्यवस्था रायपुर से नियंत्रित की जाती है। स्थानीय स्तर पर कोई भी अधिकारी इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। यदि समय रहते इस भवन की सुरक्षा की गई होती, तो आज यह पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार खड़ा होता।


