आकाश आनंद की बसपा में वापसी, मायावती ने माफ किया:कहा- ससुर की गलतियां अक्षम्य, उत्तराधिकारी भी नहीं बनाऊंगी

आकाश आनंद की बसपा में वापसी हो गई है। मायावती ने उन्हें फिर से बसपा में काम करने का मौका दिया है। दो घंटे पहले आकाश आनंद ने मायावती से सार्वजनिक माफी मांगी थी। उन्होंने रविवार को X पर एक भावुक पोस्ट लिखी। जिसमें कहा- माफ कर दीजिए और पहले की तरह पार्टी में काम करने का मौका दीजिए। ससुरालवालों को अब बाधा नहीं बनने दूंगा। रिश्तेदारों-नातेदारों की सलाह भी नहीं लूंगा। पार्टी में बड़े और पुराने लोगों की इज्जत करूंगा। आकाश आनंद ने पार्टी में दोबारा शामिल किए जाने की गुहार लगाई है। आकाश मायावती के सबसे छोटे भाई आनंद के बेटे हैं। मायावती ने उन्हें 15 महीने में 2 बार उत्तराधिकारी घोषित किया, लेकिन दोनों ही बार उन्हें हटा दिया था। सूत्रों का कहना है कि आकाश आनंद की फिर से बसपा में वापसी हो सकती है। हालांकि अब उन्हें नेशनल कोआर्डिनेटर बनाया जाएगा, इस पर संशय है। आकाश बोले- आगे से कोई भी गलती नहीं करूंगा
आकाश आनंद ने कहा, मायावती को मैं अपना दिल से एकमात्र राजनीतिक गुरू और आदर्श मानता हूं। आज मैं यह प्रण लेता हूं कि बहुजन समाज पार्टी के हित के लिए मैं अपने रिश्ते-नातों को और खासकर अपने ससुराल वालों को कतई भी बाधा नहीं बनने दूंगा। कुछ दिनों पहले किए गए अपने ट्वीट के लिए भी माफी मांगता हूं। जिसकी वजह से मुझे पार्टी से निकाल दिया गया है। आगे से मैं अपने किसी भी राजनीतिक फैसले के लिए किसी भी नाते रिश्तेदार और सलाहकार की कोई सलाह मशविरा नहीं लूंगा। और सिर्फ बसपा सुप्रीमो के दिशा-निर्देशों का ही पालन करूंगा। पार्टी में अपने से बड़ों की और पुराने लोगों की भी पूरी इज्जत करूंगा और उनके अनुभवों से भी काफी कुछ सीखूंगा। बहनजी से अपील है कि वे मेरी सभी गलतियों को माफ करके मुझे फिर से पार्टी में कार्य करने का मौका दिया जाए, इसके लिए मैं सदैव उनका आभारी रहूंगा। साथ ही अब मैं आगे ऐसी कोई भी गलती नहीं करूंगा, जिससे पार्टी व बहन जी के आत्म-सम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुंचे। मायावती ने कहा था- आकाश ससुर के प्रभाव में स्वार्थी-अहंकारी हो गया
बसपा प्रमुख मायावती ने 3 मार्च को भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाल दिया था। कहा था- आकाश को पश्चाताप करके अपनी परिपक्वता दिखानी थी। लेकिन, आकाश ने जो प्रतिक्रिया दी, वह राजनीतिक मैच्योरिटी नहीं है। वो अपने ससुर के प्रभाव में स्वार्थी, अहंकारी हो गया है। बसपा सुप्रीमो ने 2 मार्च को आकाश को पार्टी के सभी पदों से हटाया था और कहा था कि वे उनके उत्तराधिकारी नहीं हैं। उन्होंने कहा था, ‘मेरे जीते-जी और आखिरी सांस तक पार्टी में मेरा कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। मेरे लिए पार्टी और आंदोलन सबसे पहले हैं, परिवार और रिश्ते बाद में आते हैं। जब तक मैं जीवित रहूंगी, तब तक पूरी ईमानदारी से पार्टी को आगे बढ़ाती रहूंगी।’ मायावती ने आकाश को कब-कब जिम्मेदारियां सौंपीं और हटाया, जानिए 15 महीने में 2 बार उत्तराधिकारी बनाया
आकाश मायावती के सबसे छोटे भाई के बेटे हैं। उन्हें 15 महीने में 2 बार उत्तराधिकारी घोषित किया गया, लेकिन दोनों ही बार हटा दिया। मायावती की 3 बड़ी बातें पढ़िए आकाश को दिया था अल्टीमेटम
बसपा सुप्रीमो ने पार्टी से निकालने के 15 दिन पहले भतीजे आकाश आनंद को अल्टीमेटम दिया था। कहा था- बसपा का वास्तविक उत्तराधिकारी वही होगा, जो कांशीराम की तरह हर दुख-तकलीफ उठाकर पार्टी के लिए आखिरी सांस तक जी-जान लगाकर लड़े और पार्टी मूवमेंट को आगे बढ़ाता रहे। आकाश के ससुर को भी पार्टी से निकाला
फरवरी में मायावती ने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया था। उनके करीबी नितिन सिंह को भी पार्टी से बाहर कर दिया। यह एक्शन संगठन में गुटबाजी और अनुशासनहीनता पर लिया था। कहा था- दक्षिणी राज्यों के प्रभारी रहे डॉ अशोक सिद्धार्थ और नितिन सिंह चेतावनी के बाद भी पार्टी में गुटबाजी कर रहे थे। इन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के चलते तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित किया जाता है। आकाश ने 2017 में राजनीति में की थी एंट्री
आकाश आनंद पहली बार 2017 में सहारनपुर की एक जनसभा में मायावती के साथ दिखे थे। इसके बाद वह लगातार पार्टी का काम कर रहे थे। 2019 में उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया। यह फैसला तब लिया गया जब सपा और बसपा का गठबंधन लोकसभा चुनाव के बाद टूटा। 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनाव में पहली बार आकाश आनंद का नाम स्टार प्रचारकों की लिस्ट में आया था। आकाश ने लंदन से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई की है। आकाश की शादी बसपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ की बेटी डॉ. प्रज्ञा से हुई है। 206 से 1 विधानसभा सीट पर सिमटी बसपा
2007 में 206 विधानसभा सीटें जीतने वाली बसपा की अब हालत ये है कि विधानसभा में सिर्फ एक विधायक है। 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश के 15.2 करोड़ वोटर में से 12.9 फीसदी वोट बसपा को मिला। उसे कुल एक करोड़ 18 लाख 73 हजार 137 वोट मिले थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा की स्थिति नहीं सुधरी। 2019 के लोकसभा में 10 सीटें जीतने वाली बसपा इस बार खाता भी नहीं खोल पाई। उसका वोट प्रतिशत 2019 में 19.43% से गिरकर 9.35% रह गया। ये विधानसभा चुनाव से भी लगभग 3 प्रतिशत कम था। महाराष्ट्र-झारखंड के बाद दिल्ली में मायूसी हाथ लगी
महाराष्ट्र-झारखंड के बाद मायावती को दिल्ली विधानसभा चुनाव से भी मायूसी हाथ लगी। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 69 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। पार्टी के नेशनल कॉआर्डिनेटर और मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने इस चुनाव में काफी प्रचार किया था। इसके बावजूद पार्टी के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं डाल पाए। आलम ये रहा कि पार्टी के अधिकतर प्रत्याशी हजार वोट का आंकड़ा भी नहीं पार कर पाए। बसपा को कुल 55,066 (0.58 प्रतिशत) ही वोट मिल पाए। यूपी में 2007 में बसपा का सबसे शानदार प्रदर्शन
यूपी की राजनीति में आज भले ही बसपा सुप्रीमो का दबदबा घटता दिख रहा है, लेकिन अब भी पार्टी के पास 10 प्रतिशत के लगभग वोटबैंक है। गठबंधन में ये किसी का भी पलड़ा भारी कर सकता है। बसपा का सबसे शानदार प्रदर्शन 2007 में रहा। तब बसपा अपने बलबूते सूबे की सत्ता में लौटी थी। विधानसभा में तब उसके 206 विधायक जीत कर पहुंचे थे। पार्टी को तब 30 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे। इस सफलता की वजह सोशल इंजीनियरिंग को माना गया था। बसपा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में अपने उन्हें सुनहरे दौर में लौटने का सपना बुन रही है। —————- यह खबर भी पढ़िए… यूपी पुलिस से सवाल- क्या तमंचा मालखाने से उड़कर गया:कोर्ट का आदेश- पुलिसवालों पर FIR लिखो; चर्चित फर्जी एनकाउंटर की कहानी जो तमंचा आरोपियों के पास दिखाया गया, वह 2014 में एक दूसरे मामले में बरामद किया गया था। मालखाने में जमा था। मालखाने में जमा तमंचे से फायरिंग कैसे की जा सकती थी? क्या तमंचा मालखाने से उड़कर गया।’ यह सवाल अपर जिला जज की कोर्ट ने कानपुर पुलिस से किया। साथ ही मुठभेड़ को संदिग्ध करार देते हुए आरोपियों को रिहा कर दिया। पढ़ें पूरा एक्सप्लेनर…

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