अभिषेक लोधी हत्याकांड मामले में तीनों आरोपी गिरफ्तार:मास्टरमाइंड मुकेश लोधी ऑनलाइन जुए में हारा था पांच लाख रुपए, हनी ट्रैप का आइडिया आया

मुरैना के दिमनी थाना क्षेत्र में 14 दिसंबर को बडागांव और महादेव का पुरा के बीच नहर में मिली युवक की लाश मामले में पुलिस ने शुक्रवार को खुलासा कर दिया। पूरे हत्याकांड की प्लानिंग का मास्टरमाइंड मुकेश लोधी है। पुलिस ने हत्या में शामिल काजल राजपूत, शशि लोधी को भी गिरफ्तार कर लिया है। मुकेश लोधी ग्वालियर में रहकर ऑनलाइन कैफे की दुकान चलाता था। ऑनलाइन जुए में 5 लख रुपए हार गया था। काजल राजपूत से उसके अवैध संबंध थे। दोनों ने मिलकर हनी ट्रैप का रैकेट बनाया जिसमें बाद में परदूपुरा गांव की तलाकशुदा महिला शशि लोधी को भी शामिल कर लिया था। हनी ट्रैप का धंधा चलता इससे पहले ही अभिषेक लोधी की हत्या करने के जुर्म में हुए वे सलाखों के पीछे पहुंच गए। इस कहानी की शुरुआत ग्वालियर से होती है। दिमनी की रहने वाली काजल राजपूत एक अच्छे घर से ताल्लुक रखती है। ग्वालियर में रहकर मध्य प्रदेश राज्य सेवा आयोग की परीक्षा एमपीपीएससी की तैयारी कर रही थी। ऑनलाइन फॉर्म भरने के दौरान हुई दोस्ती काजल राजपूत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती थी। ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए मुकेश लोधी की दुकान पर जाया करती थी। बार-बार जाने के दौरान कभी उसके पास फॉर्म भरने के रुपए होते थे तो कभी नहीं होते थे। मुकेश लोधी उसके फॉर्म भर दिया करता था और उसकी फीस भी उधार कर दिया करता था। इस तरह दोनों का एक दूसरे से संपर्क बढ़ गया और देखते ही देखते दोनों के बीच दोस्ती हो गई। कुछ दिनों बाद यह दोस्ती प्यार में बदल गई। ऑनलाइन गेम की लत ने किया मोहताज मुकेश लोधी जहां एक तरफ ऑनलाइन कियोस्क सेंटर चलता था वहीं दूसरी तरफ उसे ऑनलाइन तीन पत्ती गेम का चस्का लग गया। वह दिन-रात गेम खेलने लगा जिसका विपरीत असर उसके धंधे पर भी पड़ने लगा। वह ऑनलाइन गेम के चक्कर में 5 लाख रुपए गंवा बैठा। दोनों ने मिलकर चुना हनी ट्रैप का रास्ता मुकेश लोधी पूरी तरह से कर्ज में डूब गया था। लोगों ने उसको उधर देना भी बंद कर दिया था। उसकी दुकान भी लगभग खत्म हो चुकी थी। कमाने का कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। दोनों ने सोचा कि क्यों न हनी ट्रैप का बिजनेस शुरू किया जाए। इसमें फंसने वाला व्यक्ति किसी से कुछ नहीं कहेगा और उनका धंधा चलता रहेगा। ग्राहकों को फंसाने इंस्टाग्राम को बनाया माध्यम काजल राजपूत में पायल के नाम से इंस्टाग्राम पर अपनी फर्जी आईडी बनाई। वह उस आईडी पर अश्लील रील बनाया करती थी। इसके साथ ही कहा करती थी, अगर किसी को उससे बात करनी है तो व्हाट्सएप के ठीक नीचे वाला बटन दबाकर उसका नंबर प्राप्त किया जा सकता है। नहीं फंसे ग्राहक काजल राजपूत द्वारा बनाई गई इंस्टाग्राम आईडी पर दिए गए नंबर पर कुछ युवाओं ने उससे संपर्क किया, लेकिन उसके चंगुल में नहीं फंसे। अभिषेक लोधी के फंसने के पीछे मुख्य वजह शशि लोधी नाम की महिला है जिसने उसे उसका परिचय कराया। शशि लोधी का मुकेश से कनेक्शन शशि लोधी एक तलाकशुदा महिला है। पति ने उसको छोड़ दिया था। वह मुकेश लोधी के संपर्क में आई थी। मुकेश लोधी ने उसे भी अपने प्रेम जाल में फंसा रखा था। दोनों के बीच लंबे समय से अवैध संबंध थे। जब मुकेश लोधी ने शशि से कहा कि कोई बड़ा मुर्गा फंसाओ तो उसने ही अपने गांव परदूपुरा निवासी अभिषेक लोधी का परिचय दिया और उसे फंसाने की साजिश रची। 6 महीने पहले ही अभिषेक ने लिया था कमरा अभिषेक लोधी ग्वालियर में PGDCA कंप्यूटर साइंस का डिप्लोमा कर रहा था। वह गोले के मंदिर स्थित रणधीर कॉलोनी में अपने मामा गिरजेश लोधी के यहां पर रहता था। वह पिछले 3 साल से अपने मां के यहां रह रहा था। बाद में लगभग 6 महीने पहले ही उसने मां के मकान के पास में एक अलग कमरा ले लिया था। मास्टरमाइंड मुकेश के इशारों पर नाची काजल मुकेश लोधी को रुपयों की सख्त जरूरत थी। उसने अपनी दोनों प्रेमिकाओं काजल और शशि को अपने प्लान के बारे में बताया। उसके बाद काजल ने मृतक अभिषेक लोधी की मौत से लगभग 12 दिन पहले ही अपनी इंस्टाग्राम आईडी के द्वारा उससे संपर्क किया। अभिषेक लोधी उसकी बातों में आ गया और 8 दिसंबर को अपने एक दोस्त को साथ में लेकर मुरैना काजल से मिलने चला गया। काजल ने मिलने से किया इनकार जब अभिषेक लोधी अपने दोस्त के साथ में काजल से मिलने मुरैना पहुंचा तो उसने बताया कि उसका दोस्त भी उसके साथ है। यह सुनकर मुकेश ने काजल से कहा कि उससे कह दो कि वह अभी उससे नहीं मिल सकती। अगर मिलना है तो अकेले में आओ। काजल ने ठीक वैसे ही किया। उसके बाद अभिषेक लोधी अपने दोस्त के साथ वापस ग्वालियर लौट आया। ग्वालियर आने पर उसने काजल से फोन से बात की तो काजल ने कहा कि अगर आना है तो अकेले आना किसी और को साथ में लेकर मत आना। अकेले बुलाने के पीछे तीनों का मकसद उसे अपने जाल में फंसाना था। फूल प्रूफ प्लान में, यह हो गई गड़बड़ 8 दिसंबर की घटना के बाद अभिषेक लोधी फिर से दो दिन बाद 11 दिसंबर 2024 को मुरैना पहुंचा। वह अकेला मुरैना गया था। वहां मुकेश ने फुल प्रूफ प्लान बनाया हुआ था। जैसे ही अभिषेक लोधी मुरैना पहुंचा तो काजल ने उसे अपने बड़ोखर वाले मकान पर न बुलाते हुए मुरैना शहर में ही रह रहे मुकेश लोधी के मकान पर बुलवाया। मकान में दो कमरे हैं जहां पर मुकेश रहता है। काजल उसे लेकर मुकेश के कमरे पर गई। वहां उसने अभिषेक के लिए चाय बनाई। चाय में नशीली गोली मिलाई। चाय पीते ही अभिषेक बेहोश हो गया। बेहोशी की हालत में काजल ने उसके साथ अंतरंग फोटो व वीडियो शूट करवाया। यह शूट मुकेश ने किया। शशि भी वहां पर मौजूद थी। दोनों ने उसके दोनों पैर तथा हाथ बांध दिए थे। होश में आने पर चिल्लाने लगा अभिषेक जैसे ही अभिषेक लोधी को होश आया उसने अपने आप को बंधा हुआ पाया। यह देखकर वह घबरा गया। वह जोर-जोर से चीखने लगा। उसकी आवाज कोई दूसरा न सुन ले इसलिए काजल ने पहले उसके सिर में बेलन से वार किया उसके बाद उन लोगों ने उसके मुंह पर तकिया रखकर उसकी आवाज को दबाना चाहा। तकिए से उसका दम घुट गया और उसकी मौत हो गई। उन लोगों ने समझा कि वह बेहोश हो गया। उसे अंदर वाले कमरे में छोड़कर वह तीनों बाहर वाले कमरे में आकर बैठ गए। तीनों सोचने लगे कि अब इस स्थिति को कैसे संभाला जाए। अंदर जाकर देखा तो ठंडा पड़ गया था अभिषेक का शरीर 11-12 दिसंबर की रात को अभिषेक का मृत शरीर अंदर कमरे में पड़ा था और वे तीनों बाहर वाले कमरे में बैठे विचार विमर्श कर रहे थे। कुछ देर बाद मुकेश ने यह जानने की कोशिश की कि, कहीं अभिषेक जाग तो नहीं गया। यह देखने के लिए अंदर गया तो देखा कि अभिषेक का शरीर ठंडा पड़ चुका था। यह देखते ही वह समझ गया कि उसकी मौत हो चुकी है। उसके मरने की जानकारी लगते ही वहां मौजूद तीनों के हाथ पैर फूल गए। अब उन्हें यह चिंता सताने लगी, कि पुलिस से कैसे बचा जाए ? काफी देर बाद मुकेश ने प्लान बनाया कि उसकी लाश को ठिकाने लगा दिया जाए, जिस किसी को कुछ पता है नहीं चल सकेगा और वह लोग बच जाएंगे। 11 तथा 12 दिसंबर की रात तीनों बाहर कमरे में बैठे रहे और अंदर अभिषेक की लाश पड़ी रही। ग्वालियर से किराए से गाड़ी लेकर गया मुकेश प्लानिंग के तहत मुकेश अगले दिन 12 दिसंबर की सुबह ग्वालियर आया और अपने दोस्त की कार लेकर मुरैना पहुंचा। मुरैना में उसने अभिषेक लोधी की लाश को डिग्गी में रखा और योजना के अनुसार महादेवपुरा गांव की नहर में रात में पटक दिया। उसके बाद तीनों ग्वालियर आ गए। पुलिस को डाइवर्ट करने फिरौती की मांग की अभिषेक लोधी की लाश को ठिकाने लगाने के बाद मुकेश ने सोचा कि अब उसकी खोजबीन शुरू होगी। इसलिए उसने दिमाग लगाया कि क्यों न, इस केस को डायवर्ट कर दिया जाए। यह सोचकर उसने अभिषेक के मोबाइल फोन से उसके पिता पदम सिंह को व्हाट्सएप पर 20 लख रुपए की फिरौती की रकम भेजने का मैसेज डाल दिया। 14 दिसंबर को नहर में मिली लाश घटना के दो दिन बाद 14 दिसंबर 2024 की सुबह 9 बजे की बात है। घुसगवा गांव​​​​​​​ का रहने वाला राधेश्याम बड़ागांव और महादेवपुरा गांव के बीच नहर के किनारे जा रहा था। उसी समय उसे नहर में अभिषेक लोधी की लाश तैरते हुए मिली। लाश को देखते ही वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा और लोगों को बुलाने लगा। देखते ही देखते वहां भीड़ एकत्रित हो गई। सभी ने कहा कि पुलिस को सूचना दे दो। राधेश्याम ने फोन पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और पुलिस ने लाश को नहर से निकाला। उसे समय लाश के दोनों पर लाल रंग के स्टॉल से बंधे हुए थे। यह वही स्टॉल था जो काजल राजपूत पहने हुए थी। इसके साथ ही लाश की आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी, जिसने पुलिस को साफ बता दिया था कि युवक की मौत स्वाभाविक नहीं है, उसकी हत्या की गई है। यह गलती कर फंसे तीनों 1- नहर में फेंकने से पहले अभिषेक की लाश के दोनों पैर तथा आंखों पर पट्टी बंधी रहने दी। जिससे पुलिस को पक्का यकीन हो गया कि, अभिषेक ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि उसकी हत्या की गई है। आरोपियों की इस गलती ने पुलिस के हत्या के एंगल को पहले ही दिन स्पष्ट कर दिया था। 2- अभिषेक की मौत के बाद आरोपियों ने उसी के मोबाइल से उसके पिता को फिरौती की 20 लाख रुपए की मांग की। 14 दिसंबर को सुबह 9 बजे अभिषेक की लाश मिल गई उसके कुछ घंटे बाद दोपहर 2 बजे उसके पिता पदम सिंह के मोबाइल पर आरोपियों ने फिरौती की रकम के लिए मैसेज डाले थे। मैसेज देखने के बाद पदम सिंह अपने भाई तथा साले के साथ ग्वालियर के गोला का मंदिर थाने पर पहुंचे और अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इस पर पुलिस को पक्का यकीन हो गया था कि यह मामला अपहरण का नहीं है बल्कि कुछ और है। 3- इस घटना के बाद आरोपी अभिषेक का मोबाइल फोन अपने पास रखे रहे। जिससे पुलिस की साइबर अपराध शाखा की टीम ने मोबाइल के आईपी ऐड्रेस को ट्रेस करते हुए, उन तक जा पहुंची। 4- साइबर टीम ने अभिषेक लोधी की इंस्टाग्राम आईडी को चेक किया। इससे स्पष्ट हो गया था कि वह उस इंस्टाग्राम आईडी को अधिक फॉलो करता था। घटना वाले दिन से पहले भी उसने उसको फॉलो किया था। जब आईडी की जांच की गई तो वह काजल की निकली जिसने पायल नाम से फर्जी आईडी बनाई हुई थी। इससे पुलिस का शक और गहराता चला गया। 5- पुलिस ने ग्वालियर तथा मुरैना रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी कैमरे चेक किये। इसके बाद वह जिस रास्ते पर गया वहां के कैमरे चेक किए, जिससे पुलिस को मुकेश लोधी के घर का पता लगा, जहां उसकी हत्या की गई थी। 6- अभिषेक लोधी के दोनों पर लाल रंग के स्टॉल से बंधे हुए थे। इसमें केस में महिला आरोपी के शामिल होने की शंका को शामिल कर दिया था। इसके बाद पुलिस काजल राजपूत के गांव श्रीमति पहुंची तथा उस स्टॉल के आधार पर पूछताछ की। क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी मुकेश लोधी ऑनलाइन तीन पत्ती गेम के चक्कर में 5 लाख रुपए गंवा बैठा था। वह कंगाल हो चुका था। उसने गलत तरीके से रुपए कमाने की प्लानिंग की। इसमें उसने काजल राजपूत और शशि लोधी को शामिल कर लिया था। काजल से उसकी पहचान मात्र 12 दिन पहले ही हुई थी। काजल ने ही उसे मिलने के लिए मुरैना बुलाया था।- शशि कुमार सिंह, थाना प्रभारी, थाना दिमनी, मुरैना

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