वक्फ बोर्ड:प्रदेश में 371 मस्जिद, 92 मदरसे, 142 ईदगाह समेत 4 हजार से ज्यादा संपत्ति

लोकसभा और राज्यसभा में वक्फ विधेयक 2025 पारित हो गया है। इसके बाद से ही देशभर में वक्फ की संपत्तियों को लेकर जानकारी मंगाई जा रही है। वक्फ बोर्ड के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 371 ​मस्जिद, 92 मदरसा, 142 ईदगाह, 434 कब्रिस्तान समेत लगभग चार हजार से ज्यादा चल-अचल संपत्तियां हैं। केंद्र सरकार की 10 सदस्यीय टीम प्रदेश के पांच जिले रायपुर, धमतरी, दुर्ग, बलौदाबाजार और महासमुंद का दौरा कर वापस लौट गई है। वहीं दूसरी टीम शेष जिलों के दौरे के लिए यहां पहुंच गई है।
दरअसल नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड की संपत्ति का ऑडिट होगा। इसे गैर कानूनी तरीके से बेचने वालों पर कार्रवाई होगी, क्योंकि छत्तीसगढ़ के वक्फ बोर्ड की और से दावा किया जा रहा है कि उनके पास छत्तीसगढ़ में पांच हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां हैं। इनमें से 85 फीसदी पर अवैध कब्जा है। बोर्ड के चेयरमैन सलीम राज का कहना है कि जिन लोगों ने वक्फ की संपत्ति पर गैर कानूनी तरीके से कब्जा किया और बेचा है, उन लोगों को नए कानून से परेशानी है, इसलिए मुस्लिम समुदाय के मासूम लोगों को गुमराह कर रहे हैं। संपत्तियों की जानकारी लेकर लौटी पहली टीम, दूसरी टीम का दौरा शुरू बताया गया है कि प्रदेश के 28 जिलों में मस्जिद, मदरसा, स्कूल, ईदगाह, मकान, दुकान, प्लाट, मजार, दरगाह, मकबरा, ईमामबाड़ा, खानकाह और कृषि भूमि जैसी करीब चार हजार से ज्यादा चल-अचल संपत्तियां हैं। इनके माध्यम से वक्फ बोर्ड अपना राजस्व बढ़ा रहा है। बोर्ड के पदाधिकारियों के मुताबिक वक्फ की संपत्ति सुरक्षित रहे, उसके ऊपर होने वाले कब्जों पर कार्रवाई की जा सके, इसलिए वक्फ अधिनियम की धारा 4 में प्रावधान है कि हर 10 साल में सर्वे होना चाहिए, लेकिन प्रदेश गठन के बाद सिर्फ एक बार 2023 में ही सर्वे किया गया है। सबसे ज्यादा मस्जिद रायपुर और दुर्ग में बोर्ड के मुताबिक रायपुर में सबसे ज्यादा 44 तो नारायणपुर में सबसे कम 1 मस्जिद है। जबकि दुर्ग में 37, बिलासपुर में 31, सूरजपुर में 35, कोरिया में 23, बलरामपुर में 22 ​मस्जिद है। इसी तरह सबसे ज्यादा 12 मदरसा कोरिया व सूरजपुर में है। इसी तरह सबसे ज्यादा 42 कब्रिस्तान सूरजपुर में हैं।
राज्य ने बोर्ड को छह साल में दिए 6 करोड़ छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड को साल 2018 से 2024 तक छह करोड़ 28 लाख रुपए ​दिए हैं। इनमें से 5 करोड़ 38 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। इनमें विज्ञापन, वेतन, सेमीनार, बिजली, अधिवक्ता, टीडीएस, पेट्रोल, कार्यालय किराया समेत कई प्रकार के चार्जेस शामिल हैं।
नए वक्फ विधेयक में क्या है प्रावधान विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन कर वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियंत्रण से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है। विधवा, तलाशशुदा महिला या यतीम बच्चों के अधिकार वाली संपत्ति को वक्फ नहीं किया जा सकेगा। इस कानून को ‘उम्मीद’ नाम दिया गया है।
नए कानून के खिलाफ राजनीतिक बयानों पर रोक लगा दी गई है। भारत में मुसलमानों को सौगात ए मोदी के बाद वक्फ संशोधन कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई में वक्त लग सकता है लेकिन यह तो स्वीकार करना होगा कि केंद्र सरकार मुसलमानों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में सुधार चाहते हैं। – डॉ. सलीम राज, चेयरमैन, राज्य वक्फ बोर्ड

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