कोटा के कर्मयोगी सेवा संस्थान एक फिर सामाजिक सरोकार में आगे रहा है। शहर के अलग अलग थाना क्षेत्र में 6 माह में मिले लावारिस शवों का विधिवत अस्थि विसर्जन करवाने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए संस्थान का चार सदस्यीय दल बुधवार को हरिद्वार के लिए रवाना हुआ। आज सुबह 10 बजे करीब पंडित नरेश प्रधान द्वारा हरकी पौड़ी पर 80 अस्थि कलश को विधि विधान से गंगा नदी में विसर्जित किया जाएगा। संस्थान के संस्थापक राजाराम जैन कर्मयोगी, अध्यक्ष अलका दुलारी जैन कर्मयोगी ने बताया कि जुलाई से 10 दिसंबर तक शहर के अलग अलग थाना क्षेत्र से 49 अज्ञात शव मिले थे। जिनकी पहचान नहीं हो सकी। इन सभी के शवों को थाना अधिकारियों के जरिए अंतिम संस्कार के लिए सुपुर्द किया गया था। संस्थान द्वारा इनका विधि विधान के साथ अंतिम संस्कार करवाया गया। इनकी अस्थियों को विर्सजन करने के लिए संभाल कर रखा गया। वहीं 31असहाय व्यक्तियों की मौत पर परिजनों को अंतिम संस्कार से संबंधित व्यवस्थाएं निशुल्क उपलब्ध करवाई गई। परिजनों ने अस्थि विसर्जन के लिए जाने में असमर्थ होने के कारण अस्थियों को संस्थान को सुपुर्द किया।
संस्थान के शहर अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि हरिद्वार गंगा किनारे हरकी पौड़ी में इन सभी अस्थियों का 10 बजे से पंडित द्वारा विधि विधान पूर्वक पिंडदान किया जाएगा। 1 घंटे तक मंत्र उच्चारण के साथ इन सभी अस्तियों को गंगा नदी में विसर्जन किया जाएगा। बाद में ब्राह्मण भोज भी करवाया जाएगा। अनिल कुमार ने बताया कि कोटा से हरिद्वार आने जाने में लगभग 16 हजार खर्च हो जाते हैं ।अस्थि विसर्जन के बाद लोगों को भोजन भी करवाते है। सभी अस्तियों को ले जाते समय एक ही टिकट लेते हैं। श्राद्ध के समय इन सभी अस्तियों का तर्पण किया जाताI है। कर्मयोगी ने बताया कि 27वीं अस्थि कलश यात्रा में चार सदस्यीय दल में लक्ष्मीनारायण गर्ग, महावीर जैन, जितेंद्र जैन भी गए हैं। संस्थान द्वारा जुलाई 2024 तक 26वीं यात्रा के जरिए 6525 अस्थि कलश विसर्जित किए जा चुके हैं।
वहीं जनवरी 2008 से अब तक 255 लावारिस मैयत का कफन दफन का इंतजाम कमेटी कर्मयोगी इंतकाल इंतजामिया द्वारा किया गया है। कमेटी द्वारा गरीब असहाय के लिए कफन दफन किट के साथ निशुल्क जनाजा वाहन एवं सैम की फातिहा का इंतजाम निशुल्क किया गया।


