रतनगढ़ में चल रही शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि शरीर की तुलना में मन की सुंदरता अधिक महत्वपूर्ण है। पंडित मिश्रा ने शिवलिंग की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि इसके मध्य भाग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि केवल बीच की हथेली का स्पर्श करने से ही व्यक्ति का कल्याण हो जाता है। कथा में उपवास के बारे में एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि उपवास का अर्थ भूखे रहना नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ है कि नियमित रूप से शिव मंदिर जाकर एक लोटा जल अर्पित करना। पारिवारिक जीवन के बारे में उन्होंने कहा कि पति-पत्नी को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। बेटी की अच्छी परवरिश से उसका वैवाहिक जीवन सुखी होता है। उन्होंने कर्म के सिद्धांत पर भी प्रकाश डाला और कहा कि अच्छे कर्मों का अच्छा फल और बुरे कर्मों का बुरा फल भगवान शंकर अवश्य देते हैं। कार्यक्रम में विधायक पूसाराम गोदारा, पूर्व विधायक अभिनेष महर्षि सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। मनु श्री महाराज, संत राम किशोर और गो सेवक कौशिक महाराज जैसे धार्मिक नेता भी मौजूद रहे।


