देवों के देव महादेव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इसके लिए साधक सोमवार, त्रयोदशी, मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव और मां पार्वती की भक्ति भाव से पूजा की करते हैं। जबकि पूजा के साथ निमित्त व्रत रखते हैं। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 25 अप्रैल को है। इसलिए इसी दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा। पंचांग गणना के मुताबिक, 25 अप्रैल को सुबह 11.44 बजे वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुरू होगी जिसका समापन 26 अप्रैल को सुबह 8.27 बजे होगा। प्रदोष व्रत पर संध्याकाल में महादेव की पूजा की जाती है। इसके लिए 25 अप्रैल को वैशाख माह का पहला प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। पंडित गोल्डी शर्मा के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6.33 से रात 9.03 बजे तक है। पंडित सोहन लाल शास्त्री और पंडित राधे श्याम के मुताबिक, वैशाख माह के पहले प्रदोष व्रत पर दुर्लभ इंद्र समेत कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक की मनोकामना पूरी होगी। ज्योतिषियों के अनुसार पहले प्रदोष व्रत पर दुर्लभ इंद्र योग का संयोग बन रहा है। इंद्र योग का संयोग दिन एवं निशा काल में भी है। इंद्र योग का समापन देर रात 11 बजकर 31 मिनट तक है। इस योग में देवों के देव महादेव की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। जबकि प्रदोष व्रत पर शिव वास योग का भी निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग सुबह 11.44 बजे तक है। इस समय तक देवों के देव महादेव नंदी की सवारी करेंगे। इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने से कई कार्यों में सफलता मिल सकती है।


