बिजुरी खदान बंद करने पर संयुक्त सलाहकार समिति ने जताया विरोध

बिजुरी खदान बंद करने पर संयुक्त सलाहकार समिति ने जताया विरोध
प्रबंधन ने खदान बंद होने की जताई थी आशंका
बिजुरी।
2 अप्रैल को बिजुरी कोयला खदान में उप क्षेत्रीय प्रबंधक ने खदान को बंद करने का नोटिस जारी करने के साथ ही सभी कर्मचारियों को 15 अप्रैल तक इच्छुक स्थान में स्थानांतरण के संबंध में कार्यालय में जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद प्रबंधन के इस फैसले पर अब श्रमिक संगठनों ने आक्रोश जाहिर करते हुए बिना संयुक्त सलाहकार समिति के सदस्यों को जानकारी दिए हुए और बगैर उनकी सहमति के ईतना बड़ा निर्णय लिए जाने पर महाप्रबंधक को पत्र सौंपते हुए इस पर आपत्ति जताई है और प्रबंधन इस निर्णय को वापस लेने की मांग की गई है।
यह है मामला
12 अप्रैल को महाप्रबंधक खनन बिजुरी उपक्षेत्र को पत्र सौंपते हुए संयुक्त सलाहकार समिति के सदस्यों ने पांच सूत्रीय शिकायत दर्ज कराई जिसमें बताया गया है कि बिजुरी कोयला खदान को बंद करने के साथ ही कर्मचारियों के स्थानांतरण की तैयारी की जा रही है जबकि इस पर संयुक्त सलाहकार समिति एवं श्रमिक संगठनों को ना तो कोई जानकारी दी गई और ना ही उनकी सलाह ली गई  जो मजदूर हित में नहीं है। शिकायत पत्र में यह भी उल्लेखित किया गया है कि मार्च महीने में बिजुरी कोयला खदान का उत्पादन 10500 टन हुआ है। वित्तीय वर्ष 2024 25 में बिजुरी खदान को उत्पादन लक्ष्य 80000 टन दिया गया था जिसके एवज में 87000 टन का उत्पादन किया गया और बिजुरी उपक्षेत्र को इसी उपलब्धि पर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। श्रमिक संगठनों ने पत्र में यह दावा किया है कि बिजुरी कोयला खदान में पर्याप्त मात्रा में कोयला अभी भी है जो कि आगामी 10 वर्षों तक सुरक्षित रूप से संचालित किया जा सकता है। इसके साथ ही मांग की गई है कि यदि किसी जिम्मेदार अधिकारी को उत्पादन और सुरक्षा के लिए नियुक्त कर दिया जाए तो बिजुरी खदान निर्बाध रूप से आगामी कई वर्षों तक संचालित की जा सकती है। कोयलांचल क्षेत्र में लगातार पुरानी कोयला खदानें जहां बंद होती जा रही हैं वहीं कोई भी नई शासकीय कोयला  खदान प्रारंभ नहीं की जा रही हैं जिसके कारण लगातार कोयलांचल क्षेत्र में कोयला खदानों के बंद होने से तथा कर्मचारियों के अन्यत्र स्थानांतरण किए जाने से कोयलांचल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़तीं जा रही है। इसके साथ ही क्षेत्र का रोजगार एवं व्यवसाय भी कोयला खदानों के लगातार बंद होने एवं यहां कार्य कर रहे कर्मचारियों का स्थानांतरण होने की वजह से ठप्प होता जा रहा है।
प्रबंधन ने नोटिस चस्पा कर कर्मचारियों से स्थानांतरण का मांगा विकल्प
एस ई सी एल हसदेव क्षेत्र अंतर्गत बिजुरी भूमिगत कोयला को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। इसके साथ ही यहां पर कार्यरत कर्मचारियों का अन्यत्र स्थानांतरण करने स्थानीय बिजुरी कालरी प्रबंधन के कार्मिक विभाग ने तैयारी भी कर ली  है। मिली जानकारी अनुसार बिजुरी भूमिगत कोयला खदान की शुरुआत 1971 में हुई थी। इसके बाद लगभग 51 वर्षों तक यह कोयला खदान संचालित होती रही।
इससे पूर्व भी बंद हो चुकी है कई कोयला खदानें
बिजुरी नगर जो की पूरी तरह से कोयला खदानों के ऊपर आश्रित है। आसपास कई कोयला खदानें होने के कारण स्थानीय लोगों को रोजगार के साथ ही व्यवसाय भी बेहतर चल रहा था लेकिन लगातार यहां कोयला खदान बंद हो रही है जिसके कारण नगर की अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। इसके पूर्व लोहसरा भूमिगत कोयला खदान, सोमना कोयला खदान, ए सिम कोयला खदान कपिलधारा खदान यहां बंद की जा चुकी हैं और अब जल्द ही  बिजुरी कोयला खदान के बंद होने की जानकारी मिली है। जिसके कारण बिजुरी नगर में सिर्फ दो खदान ही शेष रह जाएंगी जिनमें कुरजा और बहेरा बांध कोयला खदान है।

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