बेटे के साथ आए पिता की भी सर्जरी कर दी:कोटा में ऑपरेशन थिएटर के बाहर खड़े थे बुजुर्ग; अंदर ले जाकर एनेस्थीसिया दिया, टांके लगाए

कोटा में बेटे के इलाज के लिए आए पिता की भी डॉक्टर ने सर्जरी कर दी। बेटे की सर्जरी के लिए ऑपरेशन थिएटर के बाहर खड़े पिता को डॉक्टर ने अंदर बुलाकर एनेस्थीसिया दिया और उनकी भी सर्जरी कर दी। जब होश आया तो उनके हाथ पर पट्टी बंधी हुई थी। बेटा अपने ऑपरेशन के बाद बाहर आया तो पिता के हाथ में पट्टी बंधी देखी। उसने जब पिता से पट्टी के बारे में पूछा तो उन्होंने पूरी बात बताई। इसके बाद अस्पताल में मौजूद स्टाफ से शिकायत की तो उन्होंने अनसुना कर दिया। बेटे ने अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को शिकायत दी है। मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। अब सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए पूरा मामला… बेटे की सर्जरी होनी थी, ऑपरेशन थिएटर के बाहर खड़े थे
बारां के अटरू निवासी मनीष पांचाल (33) ने बताया- कुछ समय पहले मेरा बारां में एक्सीडेंट हुआ था। 12 अप्रैल को मेरे पैर की प्लास्टिक सर्जरी होनी थी। 10 दिन पहले मुझे SSB में भर्ती करवाया गया था। 12 अप्रैल को सुबह मेरी सभी जांचे हुईं और इसके बाद ऑपरेशन थिएटर में ले गए। ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर एनेस्थीसिया दिया
मनीष ने बताया- मेरे पिता जगदीश (60) ऑपरेशन थिएटर के बाहर खड़े होकर मेरी सर्जरी होने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान ऑपरेशन थिएटर के अंदर से किसी स्टाफ ने जगदीश नाम से आवाज लगाई। जगदीश नाम सुनते ही पिता खड़े हो गए। पिता के खड़े होते ही स्टाफ उन्हें अंदर ले गया और एनेस्थीसिया दे दिया। मनीष ने बताया- पिता को बेहोश करने के बाद हाथ में चीरा लगा दिया और फिर 6-7 टांके लगा दिए। मेरे पिता न तो हॉस्पिटल में भर्ती थे, न ही उनके कोई तकलीफ थी। मेरा ऑपरेशन होने के बाद मैं बाहर आया तो पिता के हाथ में पट्टी बंधी देखी। मैंने जब उनसे पट्टी के बारे में पूछा तो उन्होंने पूरी बात बताई। मनीष ने कहा- इस पर मैंने अस्पताल में मौजूद स्टाफ से शिकायत की, लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। मनीष ने बताया- यह अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगा ते हुए कहा- बिना जांच के उनको (पिता) ओटी में लेकर चीरा लगा दिया। मेरे पिता जगदीश को पिछले 10 साल से पैरालिसिस है। उन्हें बोलने में तकलीफ भी है। 3 सदस्यीय जांच कमेटी गठित
कोटा मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर संगीता सक्सेना ने बताया- घटना के बारे में आज ही पता लगा है। परिजनों ने हॉस्पिटल अधीक्षक को शिकायत दी थी। मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी गठित की है। जांच के बाद ही असलियत का पता लगेगा कि आखिर यह कैसे हुआ। सर्जन से बात करने की कोशिश की तो कहा- बिजी हूं
जानकारी के अनुसार, 12 अप्रैल को डॉ. राजेंद्र महावर (वेस्कुलर सर्जन) की ओटी थी। उसी दिन प्लास्टिक सर्जन डॉ. निर्मल गुप्ता ने जगदीश के बेटे मनीष की प्लास्टिक सर्जरी की थी। मामले को लेकर वेस्कुलर सर्जन से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने व्यस्त होने का हवाला दिया। डॉक्टरों की लापरवाही पर उठ रहे सवाल
मनीष ने बताया- मरीज को ऑपरेशन थिएटर में लेने से पहले उसकी जांच होती है। उसके बाद ही मरीज को एनेस्थीसिया की डोज दी जाती है। मेरे पिता हॉस्पिटल में भर्ती नहीं थे। ऑपरेशन थिएटर में मरीज को ले जाने से पहले ड्रेस पहनाई जाती है। उन्होंने ऐसी कोई ड्रेस नहीं पहनी थी, इसके बावजूद अस्पताल स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया। मेरे पिता के हाथ में कोई चोट नहीं थी। इसके बाद भी चीरा लगा कर टांके लगा दिए।

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