पॉक्सो कोर्ट-2 के पीठासीन अधिकारी अमित सहलोत ने पांच साल पुराने एक रेप की कोशिश के मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी पूरन सिंह मीणा को दोषी करार दिया। आरोपी को पांच साल की सजा सुनाई गई, साथ ही 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। विशेष लोक अभियोजक शिवराज सिंह ने बताया कि घटना 29 अगस्त 2020 की है। बड़ीसादड़ी थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने थाना में रिपोर्ट दी थी कि 28 अगस्त की शाम 6 बजे उसकी 14 साल की नाबालिग बेटी घर पर अकेली थी। इसी दौरान आरोपी पूरन सिंह घर में घुस आया और बच्ची के साथ रेप की कोशिश की। घटना के समय पीड़िता की चीख सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे। उन्हें देख आरोपी घबरा गया और तुरंत वहां से फरार हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया। इसके बाद मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो न्यायालय में चली, जहां दोनों पक्षों की बहस, सबूत और गवाहों को सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में इस बात पर जोर दिया कि नाबालिग पीड़िता की गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस बात को साबित करते हैं कि आरोपी की मंशा रेप की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपी को बेकसूर बताया, लेकिन सबूतों के अभाव में उनका पक्ष मजबूत नहीं हो पाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिग बच्चियों के साथ अपराध करने वाले व्यक्तियों को समाज में बख्शा नहीं जा सकता। ऐसे मामलों में न्याय की सख्ती जरूरी है ताकि समाज में एक सशक्त संदेश जाए और अन्य लोग इस तरह की आपराधिक मानसिकता से बाज आएं। पीठासीन अधिकारी अमित सहलोत ने पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी मानते हुए पांच साल की सजा दी। इसके साथ ही 20,000 रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया गया। यह जुर्माना पीड़िता को मुआवजा देने के लिए उपयोग में लिया जाएगा।


