अगर फैक्टरी में कोई खामियां होंगी तो सुधार के लिए एक साल का समय मिलेगा

भास्कर न्यूज | अमृतसर फैक्टरी अधिनियम 1948 और पंजाब फैक्टरी नियम 1952 के तहत लाइसेंस रिन्यूअल करवाने और बिल्डिंग बायलॉज फायर विभाग से एनओसी लेने के लिए बदलाव की तैयारी है। 27 जून 2018 से पहले जो फैक्टरी 1948 एक्ट के तहत बनी या अप्रूव हुई थी और 27 जून 2018 से पहले लाइसेंस लिया था और इस के बाद फैक्टरी में कोई बदलाव या विस्तार नहीं किया तो बिल्डिंग के अप्रूवल को लेकर जांच पोर्टल पर अप्लाई करने की जरूरत नहीं होगी। वहीं अगर फैक्टरी में कोई बदलाव-विस्तार या संशोधन किया है, तो नियम के अनुसार एस्टीबेलिटी सर्टिफिकेट एक साल के अंदर देकर अप्रूव करवाना होगा। यह सर्टिफिकेट ऑनलाइन भी जमा करवाया जा सकता है। इसके अलावा लाइसेंस भी जमा करवाना होगा। पहले फायर विभाग से एक साल के लिए एनओसी जारी होने के बाद दोबारा लेने की जरूरत नहीं होती थी। सिर्फ लाइसेंस रिन्यू कराते थे। वहीं अब जो फैक्टरी लाइसेंस रिन्युअल कराएंगे वह खतरनाक वस्तुओं (कैमिकल-बम-घातक चीजें बनाने के लिए इस्तेमाल करने वाली सामग्री) का इस्तेमाल नहीं करेंगे। हालांकि यह नियम खतरनाक इंडस्ट्रियों (कैमिकल) पर लागू नहीं होगा। फायर विभाग के नियम अनुसार ही लाइसेंस वैध होंगे। कोई फैक्टरी लाइसेंस अवधि के दौरान बंद हो जाती हैं, तो उसकी सूचना संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग जो 27 जून 2018 से 19 अक्टूबर 2022 तक बनी है, तो लेबर डिपार्टमेंट से एक साल के अंदर अप्रूव कराना होगा। अप्रूव नहीं करवाया तो शपथ पत्र देना होगा कि एक साल के अंदर अप्रूव करवा लेंगे। 19 अक्टूबर 2022 के बाद बने फैक्टरी जो निगम लिमिट के बाहर हैं तो अप्रूवल फैक्टरी एक्ट के तहत अनिवार्य होगी। यदि फैक्टरी में कोई कमियां हैं, तो अंडरटेकिंग देना होगा कि एक साल के अंदर सुधार करवाकर अप्रूव करवा लेंगे। निगम लिमिट के अंदर जो इंडस्ट्री पार्क हैं, एक्ट के तहत सेक्रेटरी से मंजूरी लेनी जरूरी होगी। एक साल के अंदर अंडरटेकिंग देनी होगी। जो भी लाइसेंस रिन्युअल होंगे उक्त नियमों के अनुसार अप्रूवल किए जाएंगे। यदि खामियां मिली तो सही करवाकर अप्रूवल करवाना होगा। फैक्टरी मालिक को सालाना रिटर्न जमा कराना होगा। लेबर वेलफेयर फंड में समय पर राशि का भुगतान करना होगा। फैक्टरी में किसी भी तरह का विस्तार करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेनी होगी। ठेकेदार कोई भी अतिरिक्त काम करने वाले वर्कर को नहीं रखेगा न ही अधिक बिजली का यूज नहीं करेगा। नियम का उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। लाइसेंस देने के बाद नियमों को ब्रेक किया तो कोई भी कानूनी कार्रवाई करने, नुकसान की देनदारी मांगने का अधिकार नहीं होगा। फैक्टरी नियम में बदलाव पर मालिकों को एनओसी-लाइसेंस रिन्युअल कराने का मौका मिलेगा। इसके अलावा सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि 1 साल तक के लिए अंडरटेकिंग दे सकेंगे। यदि फैक्ट्री में कोई खामियां होंगी तो उसमें सुधार के लिए एक साल का समय है। ज्वाइंट डायरेक्ट फैक्टरी ने यह लेटर परियोजना प्रबंधक को भेजा है। साथ ही पोर्टल को अपग्रेड करने के लिए एनआईसी को लिखा है। साथ ही 7 दिन में रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि आईएएस तेजवीर सिंह की चेयरमैनशिप में मीटिंग हुई थी जिसमें यह फैसला लिया गया है। हालांकि रिपोर्ट फाइनल होने के बाद इसे लागू कराया जाएगा।

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