ऐसी मशीन जो एक दिन में बनाएंगी 5 हजार सिकोरे:पाली के व्यक्ति ने बनाई मशीन, समय बचेगा, उत्पादन बढ़ेगा, बनेंगे आत्मनिर्भर

पाली शहर के रोटरी क्लब भवन सभागार में बुधवार शाम को लघु उद्योग भारती पाली और रोटरी क्लब पाली के संयुक्त देखरेख में कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें पांच लोगों को मिट्‌टी के बर्तन बनाने वाली पांच मॉडर्न मशीनें किश्तों पर दी गई। ताकि पालीवासियों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। इस मशीन की खासियत यह है कि इसका उपयोग कर समय बचेगा और उत्पादन बढ़ेगा। मशीन बनाने वाला भी पाली निवासी है उनका दावा है कि इस मशीन के जरिए एक दिन में पांच हजार सिकोरे बनाए जा सकते है। इसके साथ ही 10 तरह की मिट्‌टी के अलग-अलग आइटम इस मशीन के जरिए बना जा सकते है। एक मशीन की कीमत 3 लाख 51 हजार
इस मशीन के बारे में बताते हुए पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख ने कहा कि इसकी कीमत 3 लाख 51 हजार रुपए है। 51 हजार रुपए एंडवास लेकर ये मशीनें दी गई। शेष रुपए करीब 15 हजार रुपए मासिक किश्तें में चुकाने होंगे। उन्होंने बताया कि पूर्व में जिन्हें यह मशीनें दी है वे अच्छी खासी इनकम जनरेट कर रहे है। फिर भी किसी का काम सेट नहीं होता है तो उनसे यह मशीन वे रिर्टन भी ले लेंगे।
उन्होंने बताया कि लघु उद्योग भारती पाली के सहयोग से पूर्व में भी पाली की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई मशीन, साड़ी फॉल मशीन और चूडिय़ों में नग लगाने की मशीनें किश्तों में दे चुके है। जिससे पाली की सैकड़ों महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी और आत्मनिर्भर बनकर घर बैठकर अच्छा कमा रही है। 10 तरह के मिट्‌टी के आइटम बनाए जा सकते
इस मशीन को बनाने वाली पाली निवासी हेमराज मालवीय बताते है कि इस मशीन से मिट्‌टी के चाय पीने के कप अलग-अलग साइज के बनाए जा सकते है। इसके साथ ही परिंडे, थाली, गिलास जैसे 10 तरह के आइटम बनाए जा सकते है। इस मशीन का उपयोग करने से समय बचेगा और उत्पादन भी बढ़ेगा। स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश
इस मौके रोटरी क्लब में सेमिनार का आयोजन हुआ। जिसमें मुख्य मेहमान के रूप में लघु उद्योग भारती के अखिल भारतीय संगठन महामंत्री प्रकाशचंद गुप्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में मौजूद शहरवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी देश प्रगति के पद पर उस समय तेज गति से अग्रसर होकर जब वहां कोई भी बेरोजगार नहीं होगा और पुरुषों के साथ महिलाएं भी रोजगार कर रही होगी। उन्होंने विकसित देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि चीन, अमेरिका जैसे बड़े विकसित देशों में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती है। कोई महिला शॉप पर काम कर रही है तो कोई तकनीकी काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में कामकाजी महिलाओं का प्रतिशत इंडिया से कई ज्यादा है। इसलिए हमें भी ऐसा करना चाहिए की महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा स्वरोजगार से जोड़े। पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख ने कहा कि समय के साथ-साथ तकनीकी काम सीखना होगा जिससे रोजगार आसानी ने मिल सके। वर्कशॉप में यह लोग रहे मौजूद
वर्कशॉप में रोटरी क्लब के अध्यक्ष ताराप्रकाश खंडेलवाल, सहायक प्रांतपाल राजकुमार मेड़तिया, सचिव वर्धमान भंडारी, लघु उद्योग भारती के विनय बम्ब, पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा, राजेंद्र सुराणा सहित बड़ी संख्या में शहर के मौजिज महिला-पुरुष मौजूद रहे।

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