प्रतापगढ़ नगर परिषद की मौजूदा बोर्ड की अंतिम बैठक गुरुवार दोपहर 3 बजे होने जा रही है। पांच साल के कार्यकाल में परिषद ने शहर के विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सभापति रामकन्या गुर्जर के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में परिषद सत्ता संघर्ष का केंद्र बनी रही। इस कारण विकास कार्य पूरी तरह से रुक गए। बैठक में केवल 9 प्रस्तावों पर चर्चा होनी है। इनमें ज्यादातर नामकरण, भवन आवंटन और सुझाव शामिल हैं। शहर की मूलभूत समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है। पेयजल संकट, कचरा निस्तारण, स्ट्रीट लाइट्स की खराबी और सड़कों की बदहाली जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे एजेंडे में शामिल नहीं किए गए हैं। नेता प्रतिपक्ष सुशील गुर्जर ने बैठक से पहले आरोप लगाया कि परिषद ने एक भी विकास कार्य धरातल पर नहीं किया है। इस तरह शहरवासियों को विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर एक बार फिर निराशा हाथ लगी है।


