राम वनवास और भरत मिलाप प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर किया

श्री बांके बिहारी कथा समिति द्वारा हैबोवाल पटेल नगर में करवाई जा रही श्री राम कथा के सातवें दिन वृंदावन धाम से पधारे आचार्य राजन कृष्ण जी महाराज ने राम वनवास और भरत मिलाप जैसे प्रसंगों का मार्मिक वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि श्री राम कथा केवल सुनने के लिए नहीं, जीवन में उतारने के लिए है। कथा में उन्होंने बताया कि कैसे श्रीराम जी माता-पिता की आज्ञा का पालन कर वन चले, कैसे भरत जी ने अयोध्या की राजगद्दी पर रामजी की चरण पादुकाएं रखीं और स्वयं भी वनवासी वेश में रहे। आज के युग में भाई भाई का दुश्मन बन चुका है, जबकि त्रेता में भाई भाई पर जान देता था। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में सुख-दुख आते रहते हैं, लेकिन परमात्मा की कृपा हो तो जीवन उज्ज्वल हो जाता है। भजन रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया पर श्रद्धालु झूम उठे। अंत में प्रभु आरती और जय श्रीराम के जयकारों से पंडाल गूंज उठा।

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