राजस्थान में भीषण गर्मी से लोगों को राहत के लिए व्यवस्था नहीं करने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। जस्टिस अनूप ढंढ ने मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए कहा- इस अदालत ने पिछले साल भीषण गर्मी से आमजन को राहत देने के लिए अंतरिम निर्देश दिए थे। 10 महीने बाद भी सरकार ने इसकी पालना नहीं की। हाईकोर्ट ने कहा- लगता है कि राज्य के अधिकारी स्वयं को सर्वोच्च न्यायालय से भी ऊपर मानते हैं। हमें यह कहने को विवश होना पड़ रहा है कि यह मामला अधिकारियों की हठधर्मिता का क्लासिक उदाहरण है। हाईकोर्ट ने कहा- प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया है। अभी से तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है। चूरू जिले में तापमान ने पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ऐसी स्थिति में भी राज्य सरकार ने कोई एक्शन प्लान तैयार नहीं किया। इन हालात में अदालत अधिकारियों की खराब कार्यप्रणाली पर अपनी आंखें बंद नहीं कर सकती है। राज्य को किसी भी सूरत में उसके कर्तव्यों से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कहा- वह एक कॉर्डिनेशन कमेटी गठित करके भीषण गर्मी से आमजन को राहत देने के लिए दिए गए निर्देशों की पालना सुनिश्चित करे। लोगों के साथ मवेशियों जैसा बर्ताव नहीं कर सकते
अदालत ने अपने आदेश में कहा- इस भीषण गर्मी में जनता को उसके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता है। राज्य के नागरिकों के साथ मवेशियों जैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता है। मनुष्य के साथ-साथ प्रत्येक जीवित प्राणी, चाहे वह पशु हो या पक्षी, सभी को जीने का अधिकार है। सरकार प्रचार पर भारी धनराशि खर्च कर रही
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- राज्य सरकार को इन आदेशों की पालना में धनराशि नहीं होने का बहाना करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। वह भी ऐसे समय में जब राज्य सरकार अपने प्रचार पर लाखों रुपए की भारी धनराशि खर्च कर रही है। विभिन्न पुरस्कार समारोह और अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जो कि जरूरी नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा- सरकार को इस भीषण गर्मी में मानव जीवन को बचाने के लिए खर्च को प्राथमिकता देनी चाहिए। करदाताओं के पैसों को जनता के हित में काम में लिया जाना चाहिए।


