आरआईसी में शुरू हुई प्रदर्शनी में राजस्थान के रंग रूप और कई चेहरों में प्रथाएं देखने को मिली। फोटोग्राफी एग्जीबिशन राजस्थान के लोगों के जीवन और संस्कृति की एक अनुभवात्मक यात्रा कराती है। इसमें पिछले 60 वर्षों में खींची गई 60 से अधिक फिल्म फोटोग्राफ्स प्रदर्शित की गई हैं। कई महिला और पुरुषों के पोट्रेट दिखे, उनके माध्यम से फोटोग्राफर ने उनकी वेशभूषा, गहने, कला संस्कृति को दिखाने का प्रयास किया है। मौका था आरआईसी के स्थापना दिवस के अवसर पर शुरू हुई प्रदर्शनी का। ज्वैलर ओर फोटोग्राफर सुधीर कासलीवाल की एनालॉग फोटोग्राफी एग्जीबिशन, ‘द सॉन्ग ऑफ लाइट – एन एनालॉग ओडिसी थ्रू राजस्थान’ प्रदर्शनी 19 अप्रैल तक चलेगी। यह तीन दिवसीय फोटोग्राफी एग्जीबिशन राजस्थान के लोगों के जीवन और संस्कृति की एक अनुभवात्मक यात्रा कराती है। इसमें पिछले 60 वर्षों में खींची गई 60 से अधिक फिल्म फोटोग्राफ्स प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें कुछ दुर्लभ सिबाक्रोम प्रिंट भी शामिल हैं। एग्जीबिशन का उद्घाटन जर्मनी, इंडोनेशिया और इथियोपिया में एम्बेसडर गुरजीत सिंह, यूके, बेल्जियम और यूरोपीयन यूनियन में पूर्व एन्वॉय, एम्बेसडर, गायत्री आई कुमार, इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (आईसीसीआर) के पूर्व महानिदेशक एम्बेसडर सतीश मेहता और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक, निहाल चंद गोयल ने किया। आरआईसी में राजस्थान की संस्कृति पर आधारित एनालॉग फोटोग्राफी एग्जीबिशन 19 तक कुम्भलगढ़ देखने पहुंची राजस्थानी लिबास में महिलाएं दिख रही है। इस फोटो को 1994-95 के दौरान क्लिक किया।भीलवाड़ा के आसीन्द में मंदिर परिसर में महिला मुंह में जूतों को दबाए फोटोग्राफ में दिख रही है। इसमें एक प्रकार की कुप्रथा को फोटोग्राफर ने कैप्चर किया है। दरवाजे की चोखट पर पानी से भरी चरी सिर पर लिए खड़ी महिला के ऊपर मोरनी पानी के लिए हवा में उड़ती दिखी।


