पूरे विश्व में 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर स्माइल योजना के तहत इंदौर के निराश्रित भिक्षुक केंद्र परदेशीपुरा में दोपहर 12 बजे हितग्राहियों के लिए ध्यान शिविर आयोजित किया गया। शिविर में ध्यान क्या है और इसे क्यों किया जाए इस पर जानकारी दी गई और सभी को मानव ध्यान कराया गया। ध्यान शिविर का आयोजन इंदौर के अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु कृष्णा मिश्रा के सानिध्य में संपन्न हुआ। इस शिविर में गुरुजी ने कहा कि ध्यान हमारा स्वभाव है, केवल हमें सजग रहने की आवश्यकता है। ध्यान, मानव जन्म की अहमियत को दर्शाता है। यह हर्ष का विषय है कि 21 जून को योग दिवस के बाद अब 21 दिसंबर (जो वर्ष का सबसे छोटा दिन है) को पूरा विश्व ध्यान में लीन हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान गुरुजी ने एक हितग्राही को मंच पर बुलाया और उससे पूछा – तुम्हें कितने पैसे चाहिए? हितग्राही ने उत्तर दिया – पचास लाख। गुरुजी ने कहा – पचास लाख दे सकता हूं, लेकिन बदले में तुम्हें अपना एक हाथ देना होगा। हितग्राही ने मना कर दिया। इस पर गुरुजी ने कहा – मानव जीवन अनमोल है, इसे व्यर्थ मत जाने दो। योग और ध्यान ही तुम्हें तुम्हारे वास्तविक स्वरूप से जोड़ सकते हैं। हितग्राही पूजा प्रजापति ने ध्यान (मेडिटेशन) करने के बाद शांति और सुकून महसूस करने की बात कही। इस अवसर पर संस्था प्रवेश और कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के अनिल कुमार भारती मंडलोई समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


