बालाघाट में शनिवार को लांजी अनुविभाग अंतर्गत बहेला में शाम 6 बजे मौसम परिवर्तन होने से एकाएक बारिश शुरू हो गई। लगभग बारिश का दौर एक से डेढ़ घंटे तक चला। जिसके कारण, जहां वातावरण और अधिक ठंडा हो गया। वहीं उपार्जन केन्द्र, सोसाइटी में पड़ी धान बारिश से भीग गई। हालांकि केन्द्र में रखी धान कितनी भीगी है। इसकी अभी जानकारी नहीं मिल सकी है। जिले में धान खरीदी की गति, जितनी तेज है, उतनी ही धीमी गति से केन्द्रों से धान परिवहन हो रहा है। यही कारण है कि कई सोसाइटियों में किसानों से खरीदी गई धान खुले आसमान के नीचे है। जिसके चलते मौसम परिवर्तन से खुले में पड़ी धान के भीगने का डर हमेशा सोसाइटी प्रभारियों को बना है। शनिवार को बहेला में एकाएक हुई तेज बारिश से सोसाइटी प्रभारी श्यामलाल राउत और लिपिक विजय मोरे और अन्य सहयोगियों ने उपलब्ध संसाधन से धान को भीगने से बचाने का काफी प्रयास किया। लेकिन कई जगह धान के नहीं ढंक पाने और नीचे पानी जमा धान भीग गई। लिपिक विजय मोरे ने बताया कि 2 दिसंबर से 20 दिसंबर तक 30 हजार 664 बोरे यानी कुल 12 हजार 265.60 क्विंटल धान खरीदी गई है। जिसका उठाव नहीं होने से वह केन्द्र परिसर में रखी थी। शाम को एकाएक तेज बारिश होने से धान को उपलब्ध संसाधन से ढंकने का काम किया गया है। उन्होंने बताया कि धान का उठाव नहीं होने से धान खरीदी करने में भी दिक्कत हो रही है। चूंकि केन्द्र अंतर्गत ग्रामों के किसानों के अलावा अन्य दूसरी जगह से भी किसान, यहां धान विक्रय करने आ रहे हैं। सेवा सहकारी समिति मर्यादित बहेला के केन्द्र में बहेला, ठेमा, अमेड़ा, अंधियाटोला, जामुनटोला, रिसेवाड़ा, टिमकीटोला, ढूटीटोला, ताडीटोला, कट्टीपार, सितेपाला के अलावा डोंगरगांव, चिचेवाड़ा, कटंगी, दरबड़ा, पंचमटोला और मुंशीटोला के किसान भी धान लेकर, यहां विक्रय करने आ रहे हैं। नागरिक आपूर्ति निगम महाप्रबंधक डीएस कटारे बताते है कि गत दिवस सभी ब्लॉकों में परिवहन की अनुमति मिल गई है। जिससे, अब सोसाइटियों में डंप धान का परिवहन किया जा रहा है। शनिवार को सभी परिवहनकर्ताओं के 134 ट्रक परिवहन के लिए लगाए गए थे। आगामी दिनों में धान के परिवहन के लिए और ट्रक बढ़ाए जा सकते हैं।


