कक्षा 1-8 तक के स्टूडेंट्स के लिए बदला टाइम:सुबह 7: 30 से 11 बजे तक लगेंगी क्लास; कलेक्टर ने जारी किए आदेश

चित्तौड़गढ़ में बढ़ती गर्मी और हीट वेव को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों के समय में बदलाव किया है। राजस्थान सरकार द्वारा 9 अप्रैल 2025 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार और पेरेंट्स की मांग को ध्यान में रखते हुए, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने स्कूल समय में बदलाव के आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार चित्तौड़गढ़ जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों की 1 से 8 तक की कक्षाएं अब 21 अप्रैल 2025 से सत्रांत तक सुबह 7:30 बजे से 11 बजे तक ही लगेंगी। यह फैसला स्टूडेंट्स को तेज गर्मी और हीट वेव से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। केवल क्लास 1 से 8 तक के स्टूडेंट्स के लिए लागू होगा नया समय यह समय परिवर्तन केवल क्लास 1 से 8 तक के स्टूडेंट्स के लिए लागू होगा। क्लास 9 से 12 तक के बच्चों और स्कूल स्टाफ के लिए पहले से निर्धारित टाइम टेबल ही लागू रहेगी। स्कूल स्टाफ को अपने निर्धारित समय पर स्कूल जाना होगा और शिविरा पंचांग के अनुसार ही स्कूल संचालन करना होगा। सभी स्कूलों को आदेश की सख्ती से पालना करनी होगी जिला प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि इस आदेश की सभी सरकारी और निजी स्कूलों को पालना करनी होगी। यदि किसी भी स्कूल का प्रधान इस आदेश की अवहेलना करता है, तो उसके खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष और जिला कलेक्टर आलोक रंजन द्वारा लिया गया है। गर्मी का कहर, लगातार बढ़ रहा तापमान चित्तौड़गढ़ में भीषण गर्मी का दौर जारी है। शनिवार दोपहर को तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि 24 घंटे पहले यह तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। हालांकि दोपहर के तापमान में 3.5 डिग्री की गिरावट आई है, लेकिन मौसम विभाग द्वारा लगातार चित्तौड़गढ़ में हीट वेव को लेकर चेतावनी दी जा रही है। वहीं, रात का तापमान भी लगभग 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला बेहद जरूरी हो गया था। पेरेंट्स ने किया फैसले का स्वागत पेरेंट्स ने जिला प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि छोटे बच्चे इतनी भीषण गर्मी में स्कूल जाना और लौटना सहन नहीं कर पाते हैं। समय में बदलाव से बच्चों की सेहत पर खतरा कम होगा और पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।

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