रविवार की शाम अनामिका आर्ट और पंजाब नाटशाला के मंच पर डा. आत्मा सिंह के लेखनी और एमेन्युल के निर्देशन से सजे नाटक ‘फारएवर क्वीन महारानी जिंदा’ का शानदार प्रदर्शन हुआ। इस प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को पंजाब के गौरवशाली अतीत, जिसे खालसा राज और शेरे पंजाब महाराजा रणजीत सिंह के नाम से जाना जाता है, से परिचित कराना था। पांच दरिया की धरती पर राज करने वाला पहला पंजाबी महाराजा रणजीत सिंह था। जिसके राज में नानकशाही सिक्का 13 पौंड और 36 डालर के बराबर था। नाटक में सिख राज के दौरान महारानी जिंदा और महाराजा दलीप सिंह के दुखांत को विभिन्न नाटकी जुगतों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। अंग्रेजों को पता था कि महाराजा रणजीत सिंह के बाद केवल महारानी जिंदा ही राज करने में समर्थ है। उन्होनें चलाकी से महारानी को देश से बाहर भेज दिया। नाटक महारानी जिंदा के जीवन संघर्ष और खोए हुए सिख राज्य की वापिसी तथा बालक महाराजा दलीप सिंह को उसका हक दिलवाने के लिए जद्दोजहद है। महारानी जिंदा वो महान औरत थी जो अंग्रेजों से बागी होकर तमाम उम्र शेरनी की तरह सिख राज के लिए लड़ती रही। नाटक में प्रीतपाल, गुरपिंदर कौर, डा.आत्मा सिंह गिल, लखविंदर लक्की, प्रियादीप कौर, रवि कुमार, जिया, समृद्धि, मानसी, निखिता, सुखविंदर सिंह ने कार्यक्रम में बाखूब भूमिका निभा कर दर्शकों। को मुत्रमुग्ध किया।


