रायपुर में हर साल जलभराव से जूझते हैं आधे वार्ड:7 साल में अर्बन फ्लड मास्टर प्लान नहीं बना, अब रिस्क मैनेजमेंट प्लान का प्रस्ताव

के साथ भास्कर रिपोर्टर अमि​ताभ अरुण दुबे की रिपोर्ट बारिश में रायपुर के 70 में से 35 वार्डों में जलभराव की स्थिति बनती है। इसे देखते हुए 2017 में केंद्रीय शहरी मंत्रालय ने नगर निगम को अर्बन फ्लड मैनेजमेंट प्लान बनाने के लिए कहा था। इसके लिए 5 करोड़ रुपए भी मिलने थे, लेकिन 7 साल तक कोई राशि नहीं मिली और न प्लान बना। हालांकि 2017 में ही मंत्रालय ने शहरी बाढ़ को रोकने एसओपी जारी किया था, जिसमें मार्च-अप्रैल से ही नालियों, अंडर ग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम की सफाई की सतत मॉनिटरिंग जैसे बिंदु शामिल किए गए। इसके बाद 2024 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने रायपुर समेत 9 शहरों से अर्बन फ्लड रिस्क मैनेजमेंट प्लान का प्रस्ताव बनाने को कहा। तब नगर निगम ने 250 करोड़ रुपए लागत का प्लान का प्रस्ताव भेजा है। ये प्लान क्या है? इससे शहर को जलभराव से कितनी निजात मिलेगी? जानते हैं ऐसे तमाम बिंदुओं से जुड़ी ये रिपोर्ट ….
25 साल से रायपुर का विस्तार हो रहा है। इससे जलभराव की समस्या बढ़ रही है। आंकलन के मुताबिक शहर की 10 से 25 प्रतिशत तक आबादी जलभराव से जूझती है। 2030 तक शहर की आबादी 17 लाख के पार होने का अनुमान है। ऐसे में जरूरी है कि नाली तंत्र पर एक व्यापक प्लानिंग हो। जिससे जलभराव की समस्या दूर हो। हमारे यहां औसतन 1240 मिमी बारिश होती है। बंधवा, छटवा, जरवाय, राजा तालाब, डूमर तालाब, आची आदि जैसे तालाबों के किनारे के वार्डों में अक्सर जलभराव होता है। तो पुरानी बस्ती, ब्राह्मणपारा जैसे निचले इलाकों में नालियां पुरानी, संकरी होने से बारिश का पानी सड़कों पर बहता है। निगम के नए प्रस्ताव में नालियों को जोड़ने, बाढ़ की चेतावनी का अलार्म सिस्टम बनाने जैसे बिंदु हैं। 30 साल में ड्रेनेज सुधारने के प्रस्ताव चर्चा तक सिमटे नए प्लान में बारिश के पानी की सही निकासी के लिए 85 करोड़ का नया नाली तंत्र बनेगा। साथ ही तालाबों की आपस में कनेक्टिविटी पर भी फोकस है। इसके पहले राजधानी बनने के बाद रायपुर में ड्रेनेज सिस्टम बनाने की करीब 2000 करोड़ रुपए की योजनाओं पर बात हुई, पर ये हवाई ही रही। किसी प्रस्ताव पर अमल नहीं हो पाया। सबसे पुराना मास्टर ड्रेन प्लान 80 के दशक में पीएचई ने बनाया था। उसके बाद 2013 में केंद्र की जेएनएनयूआरएम स्कीम में सिंगापुर की कंपनी से सर्वे हुआ। इस पर करीब 2 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसमें 900 करोड़ के ड्रेनेज सिस्टम का प्रस्ताव आया। उसे केंद्र से मंजूरी नहीं मिली। फिर मिशन अमृत में 2016 में कोशिश हुई। जिसमें 2016 से 2020 तक 1191 करोड़ का नया नाली तंत्र बनाने का प्रस्ताव दिया गया। इसे भी केंद्र से मंजूरी नहीं मिल पाई। 4 पूर्व महापौर से भास्कर सवाल- आपके टर्म में क्यों नहीं बना ड्रेनेज सिस्टम, जवाब- केंद्र या राज्य से मंजूरी ही नहीं दी गई रिस्क मैनेजमेंट प्लान के प्रस्ताव में इनका जिक्र अर्बन फ्लड रिस्क मैनेजमेंट प्लान के लिए चुने गए शहर – रायपुर,भोपाल,पटना, त्रिवेंद्रम, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, जयपुर, कानपुर और विशाखापट्टनम।

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