आज सिविल सर्विस डे:ओपी चौधरी राज्य गठन के बाद प्रदेश से निकले पहले कलेक्टर, तब 22 साल के थे

सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए मिडिल से ही नॉलेज बढ़ाने बच्चों को अखबार पढ़ाएं, लेखन क्षमता बढ़ाने निबंध प्रतियोगिता में शामिल हों: चौधरी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी बचपन से ही हो जानी चाहिए। मिडिल क्लास से ही बच्चों को न्यूज पेपर पढ़ाएं, समाचार सुनाएं। इससे देश-दुनिया की नॉलेज बढ़ेगी। ईमेल लिखें, इससे लैंग्वेज पर पकड़ अच्छी होगी। राइटिंग स्किल बढ़ाने के लिए तात्कालिक निबंध प्रतियोगिता में भाग लें। ये कहना है 22 साल की उम्र में यूपीएससी की परीक्षा पास कर कलेक्टर बनने वाले ओपी चौधरी का। चौधरी वर्तमान में छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री हैं। सिविल सर्विस डे पर उन्होंने भास्कर से परीक्षा की तैयारी से लेकर यहां मौजूद संसाधनों पर खास बातचीत की। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश… लैंग्वेज, जनरल अवेयरनेस, राइटिंग स्किल, राइटिंग स्पीड, स्टेज फोबिया न होना सफलता के लिए जरूरी सिविल सर्विसेस परीक्षा में सफल होने के लिए सबसे जरूरी क्या है?
चौधरी: इसके लिए 5 पॉइंट जरूरी हैं। पहला- लैंग्वेज, दूसरा- जनरल अवेयरनेस, तीसरा- राइटिंग स्किल, चौथा- राइटिंग स्पीड और पांचवा- स्टेज फोबिया ना होना। लैंग्वेज किसी भी बेहद जरूरी है। राइटिंग स्पीड जरूरी है, क्योंकि आपको नॉलेज है, पर आप तेजी से लिख नहीं सकते तो पेपर पूरा नहीं कर पाएंगे।
नालंदा परिसर जैसी लाइब्रेरी सभी जिलों में बनेगी, ये कितनी जरूरी है?
जवाब: पिछले और इस साल के बजट को मिलाकर प्रदेश में 30 नालंदा परिसर डेवलप होने वाले हैं। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए इकोसिस्टम व अच्छे इंवायरनमेंट का होना बहुत जरूरी है। याद है 2000 के आसपास रायपुर, भिलाई और बिलासपुर में यूपीएससी की 50 किताबें तक नहीं मिलती ​थीं, जबकि आईआईटी की थीं। कोई प्री निकालने वाला नहीं मिलता था, जो बताए तैयारी कैसी करनी है? मेरा मानना है कि जिसका अभाव का सामना आपने किया, उससे दूसरों को बाहर निकालें। नालंदा ​परिसर जैसी जगह पर तैयारी करने वाले मिलते हैं, बातें करते हैं, नॉलेज शेयर करते हैं।
तैयारी के लिए कोचिंग कितना जरूरी है? क्या फायदे हैं?
जवाब: पहले के समस ये सही था, पर आज टेक्नोलॉजी ने सब आसान कर दिया है। ऑनलाइन किताबें, स्टडी मटेरियल मिल जाता है और बिना कोचिंग के भी ये कर सकते हैं। हां, कोचिंग में सिलेबस पूरा होता है, फोकस रहता है, अनुशासन रहता है।
22 साल की उम्र में आईएएस बने, पर जल्द ही नौकरी क्यों छोड़ दी?
जवाब: मैं अलग टाइप से सोचने वाला हूं। मुझे पहले ही पिताजी की जगह पर सरकारी नौकरी मिल जाती, पर ऐसा नहीं किया और यूपीएससी की तैयारी कर आईएएस बना। 13 साल बाद नौकरी छोड़कर राजनीति में आया। अपने पैशन के साथ समाज के बारे में सोचना चाहिए। राजनीति सबसे इम्पॉर्टेंट है, लेकिन लोग इससे दूर भागते हैं। अच्छे लोगों के राजनीति में आने से ही लोकतंत्र बेहतर होगा। मैंने ये चुनौती स्वीकार की।
आईएएस बनना आसान है या नेता?
जवाब: कॉम्पीटिशन वाइज देखेंगे तो आईएएस में एंट्री करना सबसे टफ है। एक बार एंट्री हो जाए तो चीजें आसान हो जाती है। जबकि राजनीति में एंट्री तो आसान है, लेकिन इसमें चैलेंज हमेशा रहता है। अच्छी सैलेरी, सुविधाएं, फिर अफसर भ्रष्टाचार में कैसे लिप्त हो जाते हैं?
जवाब: अर्थव्यवस्था जैसे-जैसे बढ़ी है, लोगों की लाइफ स्टाइल बदली है। लोगों की जीवनशैली खर्चीली हो गई है। छोटी-छोटी चीजों से फेवर लेने की शुरुआत होती है। फिर आगे उसकी लिमिट नहीं होती।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए छत्तीसगढ़ में किस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं?
जवाब: भ्रष्टाचार को रोकने सरकार टेक्नोलॉजी को यूज करके सिस्टम को ट्रांसपरेंट बना रही है। ट्रांसपेरेंसी से आप भ्रष्टाचार को खत्म कर सकते हैं। इसके लिए हम हर चीज को ऑनलाइन करते जा रहे हैं। आप पंजी​यन विभाग ही ले लें, जमीन की रजिस्ट्री पर सुगम एप पर फोटो खींचकर अपलोड करनी होती है। इससे जमीन की पूरी जानकारी सिस्टम में आ जाती है और इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं हो सकेगा।
युवाओं को क्या मैसेज देना चाहेंगे?
जवाब: काबिल बनें, अपने अंदर ऐसी योग्यता डेवलप करें कि आपकी डिमांड हर जगह रहे। अपनी योग्यता बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए। ये हमारा लक्ष्य रहे कि कामयाबी के पीछे ना भागें, काबिलियत के पीछे भागें।

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