लखनऊ रेपर्टवा फेस्टिवल में कलाकारों का लगा जमावड़ा:जावेद अख्तर ने साझा किया शहर के किस्से, राहगीर के गीतों पर जमकर झूमे दर्शक

लखनऊ में चल रहे रेपर्टवा फेस्टिवल सीजन 12 के तीसरे दिन साहित्यकारों , कलाकारों का जमावड़ा लगा। लक्ष माहेश्वरी की स्लैम कविता , गीतकार एवं कहानीकार राहगीर की मधुर धुनों और जावेद अख्तर की साहित्यिक चर्चाओं ने दर्शकों को वाह-वाह कहने पर मजबूर कर दिया। मंच पर रोशन अब्बास के साथ जावेद अख्तर ने लंबी गुफ्तगू किया । इस दौरान उन्होंने लखनऊ से जुड़ी यादों को दर्शकों के साथ साझा किया। चर्चा के दौरान जावेद अख्तर ने मजाज लखनवी , कैफी आजमी जैसे दिग्गज शायरों पर भी चर्चा किया। इन्होंने कहा कि यह दोनों शायर दो अलग जनरेशन के हैं। जावेद अख्तर ने कहा कि आज रील्स का जमाना है , इसके माध्यम से कविताओं की अहमियत बढ़ गई है। साहित्य सोशल मीडिया के माध्यम से एक देश से दूसरे देश तक आसानी से पहुंच रहा है। चर्चा के दौरान जावेद अख्तर ने युवाओं को शादीशुदा जिंदगी के पहलुओं से भी रूबरू करवाया। उन्होंने कहा कि शादीशुदा जिंदगी एक अग्नि परीक्षा है । यहाँ पर्दे के रंगों से लेकर दीवार के कलर तक पति-पत्नी की राय हमेशा एक सी नहीं होती है। जावेद अख्तर हंसते हुए बोले इस अग्नि परीक्षा से जो गुजर गया मानो उसका जीवन सफल है इस पर दर्शकों ने भी खूब ठहाके लगाए। ‘पैसा कमाने के उद्देश्य से काम न करें’ मंच पर चर्चा के दौरान जावेद अख्तर ने अभिभावकों और नौजवानों को जिंदगी जीने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं की डॉक्टर का बेटा डॉक्टर और इंजीनियर का बेटा इंजीनियर बने। बच्चे जो करना चाहते हैं उन्हें करने दें। मगर युवाओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए जो काम करें वह शानदार हो। जूता पॉलिश करने का काम हो , या घास काटने का इसमें एक्सीलेंस होना चाहिए। हमेशा उसी काम पर फोकस करें जिससे मोहब्बत हो सिर्फ पैसा कमाने के उद्देश्य से काम ना करें। लखनऊ से अलग रिश्ता है जावेद अख्तर ने कहा कि जब लोग पूछते हैं कि मैं कहां का हूं तो खुद को लखनऊ का बताता हूं। हमने केल्विन तालुकेदार स्कूल से पढ़ाई किया। लखनऊ में एक लंबा समय गुजारा। इस शहर को खूब जिया । लखनऊ से एक अलग रिश्ता है जो हमेशा रहेगा। राहगीर को सुनकर झूम उठे दर्शक रेपर्टवा के मंच पर युवा गीतकार और साहित्यकार राहगीर ने अपने शब्दों से दर्शकों का मन मोह लिया। गले में गिटार टांग कर ‘अभी पतझड़ नहीं आया , अभी से पत्ते झड़ गए’ जैसे ही पहली पंक्ति पढ़ी चारों ओर से तालियां गूंजने लगी। इसके बाद ‘यह जो हंस रही है दुनिया मेरी नाकामयाबियों पे, ताने कस रही है दुनिया मेरी नादानियां पे’ गीतों की शानदार प्रस्तुति दिया। इसके बाद दर्शकों की मांग पर ‘भाई राहगीर हम कौन सी गाड़ी में चढ़ गए’ और ‘फूलों की लाशों में ताजगी चाहता है’ सुनाया है। राहगीर के हर एक गीत पर दर्शक झूमते हुए और तालियां बजाते हुए नजर आए।

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