दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने राम मंदिर, शिवाला बाग भाइयां, बटाला रोड पर सत्संग का आयोजन किया। यह सत्संग एक आंतरिक यात्रा का आह्वान था। इसमें साध्वी गौरी भारती ने श्री आशुतोष महाराज के विचार साझा किए। उन्होंने जीवन के गहरे अर्थों पर प्रकाश डाला। साध्वी जी ने कहा कि मनुष्य और पशु में सबसे बड़ा अंतर चेतना और विचारों का होता है। पशु अपनी प्रवृत्तियों से चलता है। मनुष्य अपने विचारों को शुद्ध कर महान बन सकता है। उन्होंने शेक्सपीयर के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संसार एक रंगमंच है और हम सभी इसमें अपनी भूमिकाएं निभा रहे हैं। इस जीवन रंगमंच पर हमें अपनी भूमिका चुनने का अवसर मिलता है और यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी भूमिका को कितना सार्थक बनाते हैं। जीवन एक कहानी की तरह है और यह हमारी शक्ति है कि हम उसे प्रेरणादायक या साधारण बना सकते हैं। साध्वी जी ने सतगुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जीवन के सच्चे और झूठे पहलुओं को केवल सतगुरु ही समझा सकते हैं। जैसे श्री कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में उनके कर्म और धर्म का मार्ग दिखाया, वैसे ही सतगुरु हमारे जीवन में प्रकाश का संचार करते हैं। सत्संग के दौरान, साध्वी बहनों ने भक्ति से भरपूर भजनों का गायन किया, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं को अद्भुत ऊर्जा और आंतरिक शांति का अनुभव हुआ। यह कार्यक्रम न केवल एक भक्ति उत्सव था, बल्कि आत्म-चिंतन और जीवन के गहरे उद्देश्यों को समझने का एक अवसर भी था। इस मौके काफी संगत मौजूद थी। मनुष्य शुद्ध विचारों से महान बन सकता है : साध्वी


