22 दिसंबर 2016, शाम 7:30 बजे जयपुर पुलिस कंट्रोल रूम में एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) का एडिशनल एसपी आशीष प्रभाकर बताया। इस पर पुलिसकर्मी ने जयहिंद कहकर उनका अभिवादन किया। एडिशनल एसपी ने कंट्रोल रूम को बताया कि जगतपुरा रोड पर एक गाड़ी में लड़की की लाश पड़ी है। तुरंत पीसीआर वैन भेजो। इसके बाद उन्होंने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया। उन्होंने न तो घटनाक्रम की पूरी जानकारी दी और न ही सटीक लोकेशन बताई। कंट्रोल रूम ने जवाहर सर्किल, शिवदासपुरा व मालवीय नगर सहित अन्य नजदीकी पुलिस थानों के एसएचओ को सूचना दी। कंट्रोल रूम से सूचना मिलने के एक घंटे बाद रात को साढ़े आठ बजे पीसीआर वैन (चेतक) घटनास्थल पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने देखा कि बॉम्बे हॉस्पिटल की निर्माणाधीन बिल्डिंग के सामने एक स्कॉर्पियो खड़ी थी। गाड़ी में युवक और युवती के खून से लथपथ शव थे। स्कॉर्पियो से खून जमीन पर टपक भी रहा था। जगतपुरा का ये इलाका शिवदासपुरा थाना क्षेत्र में है। ऐसे में चेतक इंचार्ज रामविलास ने शिवदासपुरा पुलिस थाने को सूचना दी। तत्कालीन सीआई दीपक खंडेलवाल मौके पर पहुंचे। वायरलैस सेट के मैसेज से पुलिस विभाग में हड़कंप सीआई दीपक खंडेलवाल ने टॉर्च की रोशनी में देखा कि ड्राइविंग सीट पर एक व्यक्ति का शव पड़ा है। उसकी दाहिनी कनपटी पर गनशॉट का निशान है। खून निकल रहा है। व्यक्ति ने अपने दाहिनी हाथ से पिस्टल पकड़ रखी थी। व्यक्ति की बगल वाली सीट पर एक युवती का शव था। युवती का सिर मृत व्यक्ति की गोद में पड़ा था। इस वजह से युवती का चेहरा दिखाई नहीं दे रहा है। स्कॉर्पियो अंदर से लॉक थी। गाड़ी में चाबी लगी हुई थी। स्कॉर्पियो के अगले टायरों के नीचे दो बीयर की कैन और कुछ दूरी पर एक शराब की बोतल खाली पड़ी मिली। इंचार्ज ने तुरंत स्कॉर्पियो गाड़ी नंबर RJ14-UB-2287 की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम को दी। एफएसएल टीम, फिंगर प्रिंट, डॉग स्क्वॉड और फोटोग्राफर भिजवाने के लिए मैसेज किए। पुलिस अभी तक इसे रुटीन क्राइम सीन ही मान रही थी। इसी दौरान सीआई खंडेलवाल को जानकारी मिली कि स्कॉर्पियो एटीएस ऑफिस की है। जब उन्होंने मृतक के चेहरे को ध्यान से देखा तो उन्हें पता चला कि शव एटीएस के एडिशनल एसपी आशीष प्रभाकर का ही है। उनके हाथ में पकड़ी गई पिस्टल पर भी नंबर-21 टैग लगा हुआ था। उन्होंने वायरलेस सेट पर इसकी सूचना दी तो पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। डीसीपी साउथ मनीष अग्रवाल के साथ ही सीनियर आईपीएस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। स्कॉर्पियो के अंदर के हालात देख सहमे पुलिस अधिकारी घटनास्थल के हालात और स्कॉर्पियो की स्थिति देखकर प्रथम दृष्टया पुलिस यही मान रही थी कि एसीपी आशीष प्रभाकर ने पहले साथ में बैठी युवती की गोली मारकर हत्या की। इसके बाद खुद ने भी आत्महत्या कर ली। स्कॉर्पियो के सभी दरवाजे अंदर से बंद थे। पुलिस ने आस-पास सबूत तलाशने की कोशिश की, लेकिन कुछ नहीं मिला। स्कॉर्पियो का लॉक खोला गया। आशीष के हाथ से बरामद ग्लोबल पिस्टल सरकारी थी। इसकी जांच के दौरान चैम्बर में एक कारतूस और 6 कारतूस मैग्जीन में मिले। वहीं घटनास्थल से पुलिस को 2 खाली कारतूस मिले। बीयर, शराब की बोतल और गाड़ी से फिंगर प्रिंट लिए। पुलिस की सूचना पर मृतक के परिजन प्रहलाद साहू मौके पर पहुंचे। उन्होंने शव की शिनाख्त की। 26 साल की युवती की भी पहचान गाड़ी में जिस युवती की लाश मिली, उसकी उम्र 25- 26 साल लग रही थी। उसने जींस व टॉप पहना हुआ था। युवती के सिर में गोली मारी गई थी। उसकी शिनाख्त अलवर जिले के राजगढ़ निवासी पूनम के रूप में हुई। वहीं आशीष प्रभाकर की दाहिनी कनपटी पर गोली का निशान था, जो आर-पार था। युवती की तलाशी के दौरान उसकी जींस की जेब से 100 रुपए मिले। स्कॉर्पियो में पुलिस को 3 मोबाइल फोन मिले। इनमें से दो पर पासवर्ड लॉक लगा हुआ था। पुलिस ने देर रात दोनों शवों को गाड़ी से बाहर निकाला और एसएमएस की मॉर्च्युरी में रखवाया। स्कॉर्पियो में रखे बीफ्रकेस में कुछ कागजात मिले। जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया। साहित्यकार के बेटे थे एसीपी आशीष प्रभाकर आशीष मूलत: अजमेर के अलवर गेट के रहने वाले थे। वे अजमेर के नामी साहित्यकार व समाजसेवी प्रफुल्ल प्रभाकर के बेटे थे। उनकी स्कूलिंग सेंट एंसलम से हुई। इसके बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद एक साल तक उन्होंने न्यूजपेपर में बतौर ट्रेनी नौकरी भी की। इसके बाद उनका आरपीएस में चयन हो गया। उनकी दो बहनें हैं। एक बहन का ससुराल जयपुर और दूसरी का ग्वालियर में है। आईएसआईएस मॉड्यूल की जांच कर रहे थे एएसपी एडिशनल एसपी प्रभाकर राजस्थान में आईएसआईएस नेटवर्क की जांच कर रहे थे। उनके पास सीकर व कर्नाटक के गुलबर्गा में आईएसआईएस नेटवर्क के केस की जांच थी। इसके अलावा आईएसआईएस से संबंध रखने वाले इंडियन ऑयल के मैनेजर सिराजुद्दीन का मामला भी उन्हीं के पास था। ऐसे में एएसपी की मौत से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। कार में मिले 2 सुसाइड नोट, पत्नी से मांगी माफी पुलिस को स्कॉर्पियो की तलाशी के दौरान एएसपी के दो सुसाइड नोट मिले। एक सुसाइड नोट पुलिस और दूसरा परिवार के नाम लिखा था। एक सुसाइड नोट में आशीष प्रभाकर ने पूनम नाम की युवती पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि पूनम कोचिंग के बहाने अधिकारियों से संपर्क करती है। इसके बाद प्यार के जाल में फंसाकर उन्हें व अन्य अधिकारियों को ब्लैकमेल कर रही थी। इसलिए मैं बतौर पुलिस अधिकारी उसे सजा देना चाहता था। वहीं, दूसरे सुसाइड नोट में एसीपी प्रभाकर ने पत्नी से माफी मांगते हुए लिखा कि मैं गलत राह पर चला गया था। पूनम मुझे ब्लैकमेल कर रही थी। मैं अपने परिवार से बहुत प्यार करता हूं। अपने बच्चों से बहुत प्यार करता हूं। मैं सबके लिए कुछ करना चाहता था, लेकिन समस्या ज्यादा बढ़ गई थी। इसलिए मुझे ऐसा करना पड़ रहा है। मुझे माफ करना। पुलिस ने दर्ज किया हत्या का केस इन सुसाइड नोट ने पुलिस जांच को सुलझाने की बजाय और उलझा दिया। सुसाइड नोट में कुछ व्यक्तियों के नाम और मोबाइल नंबर भी लिखे थे। एसीपी ने पुलिस से इनसे पूछताछ करने की भी बात कही। पुलिस सुसाइड नोट के आधार पर इस ब्लैकमेलिंग रैकेट की जांच में जुट गई। पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाशी व सघन जांच के लिए उसे जब्त कर लिया। इस संबंध में शिवदासपुरा पुलिस थाने में धारा 302 के तहत केस दर्ज किया। इसकी जांच सीआई दीपक खंडेलवाल को दी गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आशीष प्रभाकर ने जयपुर में कोचिंग इंस्टीट्यूट खोला था। इसके बाद से ही आशीष और पूनम के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। कई अहम सवालों के जवाब मिलना अब भी बाकी था… कल पार्ट-2 में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब…


